माहे रमजान के दूसरे दिन शनिवार को रोजेदारों ने नियमों के मुताबिक सहरी के बाद दिनभर रोजा रखा और शाम को अफ्तारी की। दिनभर इबादत की। दूसरे दिन भी मस्जिदों में रोजेदारों की अच्छी खासी सहभागिता नजर आई।
मुकद्दस माहे रमजान का पहला अशरा जुमे के दिन से शुरू हो चुका है। यह अशरा अभी आठ दिन और चलेगा। यह अशरा रहमतों का है। इसमें अल्लाह अपने वंदों पर रहमतों की बरसात करता है। रोजेदार अल्लाह की इबादत करते हैं। शनिवार को तय समय पर सहरी की गई।
रोजेदारों की अच्छी खासी सहभागिता शहर की विभिन्न मस्जिदों में दिखी। नमाज अदा की गई। कौम व मुल्क के लिए दुआए की गई। मदरसा गोसुल आलम चंदौसी के नाजिमे आला हाफिज अब्दुल मतीन अशरफी बताते हैं कि पहली रमजान को जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं। दोजख के दरवाजे बंद हो जाते हैं।
शैतानों को जकड़ दिया जाता है। रमजान की हर तारीख अहम है, इनमें भी तीन, छह, तेरह, सत्रह, अट्ठारह, सत्ताइश तारीख काफी अहम है। रमजान पाक के आखिरी दिन इतने लोगों को दोजख से आजाद किया जाता है, जितने लोगों को पहले रमजान से आखिरी रमजान तक आजाद किया जाता है। उन्होंने कहा कि हम सभी मुसलमानों को चाहिए कि वह अपने गुनाहों की माफी मांगे और ज्यादा से ज्यादा सदका खैरात करें।