चंदौसी के नरौली क्षेत्र में गन्ने की पतेई जलाते किसान। अमर उजाला
दिल्ली, एनसीआर ही नहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, नोयडा, मुरादाबाद व संभल सहित कई जिले भी धुंध की चपेट में है। कहा भी गया है कि धुंध बढ़ने का एक कारण धान की पराली व गन्ने की पतेई (फसल अवशेष) को जलाना भी है। लेकिन इसके बावजूद भी क्षेत्र में किसान लगातार पराली व पतेई जला रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन इस पर पाबंदी नहीं लगा पा रहा है। जिससे धुंध में और इजाफा हो सकता है।
दिल्ली, एनसीआर में तो धुंध का कहर है, जिससे मानव जीवन प्रभावित हो रहा है। धुंध ने नोयडा, गाजियाबाद के बाद संभल, मुरादाबाद तक को भी चपेट में ले लिया है। हवा में नमीं बढ़ने पर रात को धुंध बढ़ जाती है। जिससे यातायात में भी दिक्कतें आने लगी है। दिल्ली सरकार एवं एनजीटी का ध्यान भी हरियाणा और पंजाब में बड़ी संख्या में जलाई जा रही पराली आदि की ओर गया है, जिन्हें खेतों में ही जलाया जा रहा है।
हालांकि भारतीय किसान यूनियन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी कि यह धुंध पराली जलाने से नहीं हो रही है, बल्कि एनजीटी व दिल्ली सरकार को बड़े शहरों में घर घर लगे एसी से निकलने वाली गर्भ हवा की ओर भी ध्यान देना चाहिए। जो प्रदूषण का कारण बन रही है। हालांकि पराली व पतेई जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है लेकिन पश्चिमी यूपी के जिलों में भी किसानों द्वारा धान की पराली के साथ साथ गन्ने की पतेई भी खूब जलाई जा रही है। जो प्रदूषण बढ़ने का कारण बन सकती है।