नगर के प्रमुख चौराहों, रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन पर लोग ठंड से निजात पाने के लिए आग से हाथ सेंकते दिखे तो कुछ कपड़ों से खुद को ढककर बचाव की कोशिश करते दिखे।
मकर संक्रांति के सूर्य के दर्शन हुए तो दिन में थोड़ी सी राहत मिली। लेकिन यह राहत शाम होने के बाद गलन और ठिठुरन भरी आफत से नहीं बचा सकी। मुख्य चौराहों पर पालिका के अलाव का इंतजाम नाकाफी साबित हुआ। रेलवे स्टेशन के बाहर लगे अलाव पर रिक्शा चालक गर्माहट ले रहे थे।
इसी तरह रोडवेज बस स्टैंड के बाहर अलाव पर कुछ परिचालक और चालक अलाव के सहारे खड़े हुए थे। मुख्य चौराहों पर भी लगभग यही स्थिति थी। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में बैठे यात्री शॉल चादर ओढ़कर ठंड से बचने की मशक्कत कर रहे थे। रोडवेज बस स्टैंड पर भी बसों के अंदर बैठे यात्री ठंड से बचने के लिए पूरे शरीर को गर्म कपड़ों से ढके नजर आए। चाय की दुुकानों पर भीड़ का नजारा दिखा। किसी ने चाय की चुस्की के साथ गर्माहट ली तो किसी ने भट्ठी के इर्द गिर्द खड़े होकर।