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Sambhal News: पंचायत सचिवालयों पर ताले, घर बैठे मानदेय ले रहे सहायक, लोग परेशान

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मढ़न। असमोली ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के साथ संचालित होने का दम भरने वाले पंचायत सचिवालयों की कहानी धरातल पर अलग है। सचिवालयों पर कहीं ताले लटके रहते हैं तो कहीं पंचायत सहायक गायब रहते हैं। आरोप तो यह भी हैं कि, जो पंचायत सहायक नियुक्त हैं, वे महत्वपूर्ण काम नहीं कर पा रहे हैं। इससे ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही है। मजबूरन ग्रामीणों को ब्लॉक, तहसील मुख्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
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यह समस्या अधिकारियों की लापरवाही और पंचायत सचिवों की अनुपस्थिति के कारण बनी हुई है। खास बात यह है कि पंचायत सचिवालयों के बंद रहने से विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर है। वहीं, इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा शिकायत करने के बावजूद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। जिससे ग्रामीणों में रोष है। उनका कहना है कि पंचायत सचिवालयों के बंद रहने से जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने में भी देरी होती है। पंचायत मनमाने तरीके से काम करते हैं। ज्यादातर समय तो ताला ही लगा रहता है। (संवाद)
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यह बोले लोग
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गांव में बना पंचायत सचिवालय सुविधाएं उपलब्ध कराने के स्थान पर असुविधाएं बढ़ा रहा है। पंचायत सहायक नियमित नहीं बैठती। किसी दिन आती है तो बिना सुविधा शुल्क लिए कोई काम नहीं करती। लोग परेशान हैं।
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लोकेश, ढाक शहीद
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खतौनी निकलवाने गए थे तो 100 रुपये लिए। वे आवास योजना के पात्र लाभार्थी हैं तो आवेदन कराने को भी कहा। इस पर दस हजार रुपये देने की मांग की गई। न देने पर आवेदन नहीं किया। इस बाबत 1076 पर कॉल की थी लेकिन कोई समाधान न मिला।
-कल्लू सिंह, ढाक शहीद।
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दो साल से अधिक समय बीत गया, पर पंचायत सहायक को कभी सचिवालय पर बैठता नहीं देखा। काम होने पर ब्लॉक के चक्कर लगाने पड़ते हैं। पहले जैसी ही स्थिति है। कोई राहत नहीं मिली है। जबकि लाखों रुपये शासन ने खर्च किए।
मोहम्मद वसी, गुमसानी।
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लाखों रुपये खर्च करके पंचायत सचिवालय का निर्माण जिस उद्देश्य से कराया, वह कोसों दूर है। न खतौनी मिल रही है और न जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र मिल रहे हैं। कई बार सक्षम स्तर पर शिकायत की गई है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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रितिक कुमार, गुमसानी।
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