पंचायत चुनाव के लिए नियुक्त उप जिला निर्वाचन अधिकारी और जिले के अपर जिलाधिकारी बीएन यादव ने इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी किया है। आदेश में उन्होंने कहा है कि निर्वाचन संपन्न होने के तीन महीने की अवधि में खर्चे का ब्योरा दाखिल करना है। इसके बाद ब्योरा दाखिल किया तो जमानत राशि वापस नहीं होगी।
जमानत राशि पाने के हकदार वही उम्मीदवार हैं जिन्होंने ने कुल वैध मतों का 1/5 अंश प्राप्त किया है लेकिन विजेता उम्मीदवार पर यह नियम लागू नहीं है। यदि किसी ने एक से अधिक जमानत राशि जमा की है और वह निर्वाचित हो गया है या फिर उसने वैध मतों का 1/5 अंश प्राप्त किया है तो उसे जमानत राशि वापस की जाएगी। यदि किसी ने जमानत राशि जमा की है लेकिन बाद में चुनाव नहीं लड़ा या फिर उसका नामांकन निरस्त हो गया। या फिर नाम वापस ले लिया है। ऐसे सभी उम्मीदवार अपनी जमानत राशि प्राप्त कर सकते हैं।
यदि उम्मीदवार चुनाव संपन्न होने की तीन महीने की अवधि में जमानत वापस लेने के लिए आवेदन नहीं करते हैं तो जमानत के लिए जमा की गई धनराशि शासन के हित में जब्त हो जाएगी। जिलाधिकारी इसे शासकीय खाते में जमा करा देंगे। यह पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 30 जुलाई 2010 को जारी पत्र के आधार पर की जाएगी।