संभल। जामा मस्जिद का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों से अभद्रता करने वाले आरोपी हफीज को पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा आरोपी काशिफ खान पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली का कहना है कि हफीज मस्जिद की देखभाल करता है, लेकिन दूसरे आरोपी काशिफ खान से कमेटी का कोई वास्ता नहीं है। सदर ने आरोप लगाया है कि काशिफ खान ने फर्जी दस्तावेज बनवा लिए हैं। उसमें भी रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद विनोद सिंह रावत ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया था कि आठ अक्तूबर को जामा मस्जिद के मुख्य गुंबद का निरीक्षण करने के लिए पहुंची एएसआई टीम को हफीज और काशिफ खान ने रोक लिया था। आरोपियों ने टीम से अभद्रता करते हुए सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई थी। इसके बाद टीम लौट आई थी। अधिकारी ने भविष्य में निरीक्षण के दौरान सुरक्षा भी उपलब्ध कराने की मांग की थी। मामला एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई के संज्ञान में पहुंचा तो उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश कर दिए। सोमवार को पुलिस ने आरोपी हफीज को गिरफ्तार कर लिया है।
एएसआई की टीम को रोकने वाले आरोपियों से कमेटी का वास्ता नहीं : सदर
जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट का कहना है कि जिन आरोपियों ने एएसआई की टीम से अभद्रता की है। उनसे कमेटी का कोई वास्ता नहीं है। हफीज मस्जिद की देखभाल करता है और दूसरा आरोपी बाहरी है। सदर का आरोप है कि दूसरे आरोपी काशिफ खान ने फर्जी दस्तावेज बनवा लिए हैं, जिनसे वह खुद को कमेटी का सचिव बताता है और मस्जिद के नाम से ट्रस्ट भी खुलवा लिया है, जबकि मस्जिद का कोई ट्रस्ट नहीं है। उनका कहना है कि वह फर्जी दस्तावेज के मामले में भी रिपोर्ट दर्ज कराएंगे। वहीं काशिफ का दावा है कि वह वक्फ बोर्ड में भी सचिव की हैसियत से पदाधिकारी है।
19 नवंबर को पदयात्रा निकालने से शहर का माहौल हो सकता है खराब : सदर
कैलादेवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरी ने 19 नवंबर को पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद से पुलिस प्रशासन सतर्क है। एसपी का कहना है कि जिले में धारा 163 लागू है और इसका उल्लंघन किसी को करने की अनुमति नहीं है। ऐलान की जानकारी के बाद जामा मस्जिद कमेटी के सदर ने कहा है कि पदयात्रा निकालने से शहर का माहौल बिगड़ सकता है। पुलिस प्रशासन को इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए। दरअसल जामा मस्जिद को श्री हरिहर मंदिर होने का दावा 19 नवंबर 2024 को किया गया था। इस दावे को एक वर्ष पूरा होने पर पदयात्रा निकालने का ऐलान किया गया है।