संभल। उम्मीद पोर्टल में चल रही तकनीकी समस्या से वक्फ संपत्तियों का ब्योरा दर्ज नहीं हो पा रहा है। बड़ी चिंता सुन्नी बोर्ड की वक्फ संपत्तियों को लेकर है, क्योंकि तीन दिन में करीब 1200 संपत्तियों का ब्योरा दर्ज किया जाना है। चार दिन से पोर्टल चल नहीं रहा है। जिले में उत्तर प्रदेश शासकीय गजट एवं दफा 37 के अनुसार करीब 1550 वक्फ संपत्तियां हैं। इनमें से 373 का ब्योरा दर्ज हो चुका है। दर्ज होने वाली संपत्तियों में 346 सुन्नी और 27 शिया बोर्ड की संपत्तियां शामिल हैं।
तथ्य यह भी है कि शासकीय गजट एवं दफा 37 के तहत शियाओं की 27 संपत्तियों का ही आंकड़ा मिला था। हालांकि ऐसी और भी संपत्तियां हो सकती हैं। इसके लिए वक्फ बोर्ड को पत्र लिखा गया है।
जिले में कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह, कर्बला, दरगाह को मिलाकर 1550 वक्फ संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों में दो-चार मदरसे भी शामिल हैं। वक्फ संपत्तियों में कुछ वर्षों पहले बनी मस्जिद और अन्य संपत्तियां भी शामिल की गई हैं। जिला स्तर पर सुन्नी संपत्तियों के लिए मोहम्मद फैसल और शिया संपत्तियों के लिए वसीम रजा एवं हसन अली सीरत को संपत्तियों का ब्योरा उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संपत्तियों का ब्योरा दर्ज कराने का कार्य चलने के बीच 28 नवंबर तक का आंकड़ा सामने आया है। इसके अनुसार सुन्नी संपत्तियों के दर्ज होने की प्रगति काफी कम है और ब्योरा उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करने की अंतिम तिथि पांच दिसंबर है। ऐसे में सभी संपत्तियों का पूरा ब्योरा इतने कम समय में कैसे दर्ज हो पाएगा, यह सवाल उठ रहा है। वक्फ संपत्तियां दर्ज करा रहे मोहम्मद फैसल और हसन अली सीरत का कहना है कि चार दिन से पोर्टल काम नहीं कर रहा है। इसलिए ब्योरा दर्ज कराया कैसे जाए। इसका दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इससे सभी मुतवल्ली की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि अंतिम तिथि पांच दिसंबर तय है।
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यह है संपत्ति ब्योरा दर्ज कराने की प्रक्रिया
किसी भी वक्फ संपत्ति को दर्ज कराने के लिए संंबंधित मुतवल्ली जिम्मेदारों के पास जाते हैं। उन्हें संपत्ति के दस्तावेज दिखाते हैं। इसके बाद संपत्ति का ब्योरा उम्मीद पोर्टल पर दर्ज किया जाता है।
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.जिले में हमने लगभग 20 संपत्तियों का ब्योरा उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करा दिया है। जबकि लोगों ने भी संपत्ति दर्ज कराई हैं। संपत्तियों को दर्ज कराने के लिए लोगों से कहा जा रहा है। यह दिक्कत भी सामने आ रही है कि किसी संपत्ति के कागज मिल नहीं पा रहे हैं। कागज तलाश किए जा रहे हैं। जो मुतवल्ली संपत्ति को दर्ज नहीं कराएंगे, उनके खिलाफ वक्फ बोर्ड कार्रवाई करेगा। अगर किसी को कोई समस्या आ रही है तो हम उसकी मदद करेंगे।
-हसन अली सीरत, नोडल शिया संपत्ति
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करीब 400 संपत्तियों का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज करा दिया है। इस कार्य में सबसे बड़ी परेशानी यह आ रही है कि फिलहाल पोर्टल नहीं चल रहा है। वहीं दफा 37 की नकल भी नहीं मिल पा रही थी। प्रशासन ने सोमवार को ही मुरादाबाद से नकल दिलाई हैं, जो लोगों को दी गई हैं। अब पोर्टल की तकनीकी समस्या दूर हो जाए तो ब्योरा दर्ज कराया जाए। जो समय बचा है वह काफी कम है। इसका समय बढ़ना चाहिए। तभी सभी संपत्तियों को दर्ज कराया जा सकता है।
-मोहम्मद फैसल, नोडल सुन्नी संपत्ति
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वक्फ संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने के लिए नोडल नियुक्त किए गए हैं। प्रक्रिया को लेकर मदद चाहिए होती है कर देते हैं। जैसे दफा 37 का रजिस्टर नहीं मिल रहा है तो मुरादाबाद से मदद कर रहे हैं। पांच दिसंबर तक संपत्तियों का ब्योरा उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराना है।
-दिलीप कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, संभल
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सांसद बर्क ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री से की मुलाकात, समय बढ़ाने की मांग
संभल। सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने दिल्ली में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से सोमवार को मुलाकात की है। उन्हें पत्र सौंपकर उम्मीद पोर्टल पर डाटा अपलोड करने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की है।
सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि अभी भी बड़ी संख्या में मस्जिद, कब्रिस्तान और अन्य वक्फ संपत्तियों का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सका है। चार दिन से पोर्टल भी नहीं चल रहा है। सांसद ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि उम्मीद पोर्टल पर ब्योरा अपलोड करने के लिए समय बढ़ा दिया जाए। जिससे सभी संपत्तियों का ब्योरा दर्ज हो सके। सांसद ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने मांग को गंभीरता से लिया है और भरोसा दिया है कि समाधान कराया जाएगा। संवाद