रासायनिक खादों के बहुतायत में हो रहे प्रयोग को रोकने के लिए कृषि विभाग ने खाद का भार घटा दिया है। अब बैग 50 किग्रा की बजाय 45 किग्रा का कर दिया गया है। बैग का वजन तो कम हुआ लेकिन लागत में 1.15 रुपये का इजाफा कर दिया गया है।
रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है। यही कारण है कि किसानों को लगातार अगले साल बढ़ाकर खाद डालने को विवश होना पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि किसान मृदा परीक्षण को व्यवहारिक रूप से नहीं अपना रहे हैं।
खेतों में खाद उसके किलोग्राम की बजाय बैग (बोरे) के हिसाब से लगा रहे हैं। किसानों की इसी सोच को देखते हुए शासन ने यूरिया खाद के 50 किलो के कट्टा का वजन घटाकर 45 किलो कर दिया है। इससे कम से कम प्रति बैग पांच किलो यूरिया की बचत होगी।
साथ ही श्रमिक को भार उठाने में भी सुविधा होगी। खेतों में भी कम खाद पड़ेगी तो उर्वरा शक्ति को भी कम नुकसान पहुंचेगा। लेकिन किसानों को प्रति किलोग्राम कीमत 1.10 रुपये अधिक पड़ेगी। इफको के जिला प्रबंधक विवेक सिंह ने बताया कि शासन ने अब 50 किग्रा वाले बैग (बोरे) का वजन अब 45 किग्रा कर दिया गया है।
50 किलो के बैग का मूल्य 326.50 रुपये था, लेकिन 45 किग्रा के बोरे की कीमत 295 रुपये रखी गई है। प्रति किलो के हिसाब से यदि यूरिया का भाव देखा जाए तो 45 किग्रा पर एक रुपये पंद्रह पैसे मूल्य अधिक होगा।