संभल। बेरोजगारी को दूर करने के उद्देश्य से ऋण लेकर रोजगार करना आम हो चला है लेकिन बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही ने उपभोक्ताओं को न्यायालय जाने पर मजबूर कर दिया है। एक मामले में सब्सिडी का लाभ न देना बैंक ऑफ इंडिया शाखा संभल को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने अनुदान राशि 1 लाख 75 हजार ब्याज और क्षतिपूर्ति सहित अदा करने के आदेश बैंक को दिए हैं।
उपभोक्ता मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय ने बताया कि संभल के गांव अख्तियारपुर ठिल्लूपुरा के निवासी रिंकू ने वर्ष 2020 में रोजगार के उद्देश्य से 5 लाख ऋण लेने के लिए बैंक ऑफ इंडिया आर्य समाज सड़क स्थित शाखा में आवेदन किया लेकिन 4 लाख 75 स्वीकृत किए गए। बताया गया कि ऋण में 1 लाख 75 हजार की सब्सिडी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा देने का प्रावधान है। ऋण लेकर उपभोक्ता ने अपना व्यापार शुरू कर दिया और ऋण राशि नियमानुसार जमा करता रहा, लेकिन बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा उपभोक्ता के अनुरोध पर भी सब्सिडी की धनराशि को उपभोक्ता के खाते में समायोजित नहीं किया। बकाया दर्शाकर रुपये 3 लाख 89 हजार का वसूली प्रमाणपत्र जारी कर दिया। परेशान होकर उपभोक्ता ने अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग संभल में परिवाद योजित किया। इस पर बैंक के द्वारा आयोग को बताया गया कि सब्सिडी की राशि सरकार द्वारा दी जाती है।
वह रिजर्व फंड में तीन वर्ष के लिए रखी जाती है, बैंक के ऋण का खाता किसी कारणवश तीन वर्ष से पहले खराब होता है, तो सब्सिडी का पैसा वापस कर दिया जाता है। लेकिन आयोग ने माना कि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना का बैंक द्वारा अनुपालन नहीं किया गया और सब्सिडी की धनराशि को उपभोक्ता के खाते में ट्रांसफर न करके अनुचित व्यवहार किया। इस पर आयोग ने बैंक ऑफ इंडिया के अध्यक्ष व शाखा प्रबंधक को आदेश दिया कि वे सब्सिडी की धनराशि 1 लाख 75 हजार दो माह के अंदर उपभोक्ता के खाते में ट्रांसफर करें। साथ ही, 15 हजार क्षतिपूर्ति व वाद व्यय के लिए भी अदा करें। अन्यथा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।