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Sambhal News: जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे के मामले में अब पांच अगस्त को होगी सुनवाई

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चंदौसी(संभल)। संभल की शाही जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे को लेकर दायर वाद के मामले में सोमवार को चंदौसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य कुमार सिंह के न्यायालय में सुनवाई हुई। हालांकि अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण न्यायालय ने सुनवाई के लिए अगली तारीख पांच अगस्त नियत की है।
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बताते चलें कि मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हालांकि उच्च न्यायालय ने 19 मई को ट्रायल कोर्ट के सर्वे कमीशन के आदेश को सही ठहराते हुए निचली अदालत में सुनवाई पर लगी रोक हटा दी है।
संभल में 19 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे को लेकर केला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरी, अधिवक्ता हरिशंकर जैन समेत आठ लोगों ने सिविल जज सीनियर डिवीजन जनपद संभल स्थित चंदौसी आदित्य कुमार सिंह के न्यायालय में वाद दायर किया था। 21 जुलाई दिन सोमवार को सुनवाई होनी थी। वादी पक्ष से केला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरी समेत दोनों पक्षों से लोग न्यायालय पहुंच गए।
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जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता शकील अहमद वारसी ने बताया कि सावन के दूसरे सोमवार और एक अधिवक्ता के आकस्मिक निधन होने पर अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। जिससे सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायालय ने मुकदमे की सुनवाई के लिए अगली तारीख पांच अगस्त नियत कर दी है।


सिमरन गुप्ता के पक्षकार बनने के प्रार्थनापत्र पर वादी पक्ष ने भी दाखिल की आपत्ति

संभल की शादी जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे के मामले दायर किए गए मुकदमे में पक्षकार बनने के लिए गाजियाबाद के सिमरन गुप्ता ने सिविल जज सीनियर डिवीजन जनपद संभल स्थित चंदौसी आदित्य कुमार सिंह के न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। इसमें उनका कहना है कि हम सनातनी हैं हमें भी इस मुकदमे में पक्षकार बनाया जाए। न्यायालय ने वादी व प्रतिवादी पक्ष से आपत्ति मांगी है। इस मामले में प्रतिवादी पक्ष ने पहले ही आपत्ति दाखिल कर दी है। एएसआई और भारत सरकार के अधिवक्ता विष्णु कुमार शर्मा ने बताया कि सोमवार को वादी पक्ष से भी आपत्ति दाखिल की गई। इस पर अब सुनवाई पांच अगस्त को होगी।
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जामा मस्जिद को लेकर अदालत में कब क्या हुुआ
19 नवंबर 2024: हिंदू पक्ष ने चंदौसी कोट में दावा किया, सर्वे के लिए अनुमति और 19 नवंबर को ही सर्वे भी किया गया

24 नवंबर 2024: जामा मस्जिद का दोबारा सर्वे करने के लिए टीमम मस्जिद पहुंची तो बवाल हो गया था।
2 जनवरी 2025: सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में कोर्ट कमिश्नर ने सर्वे रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश की।

3 जनवरी: जामा मस्जिद इंतजामिया कमेी ने सुप्रीम कोर्ट में सर्वे पर रोक लगाने की याचिका दायर की।
8 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाई।

19 मई: हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष् की सर्वे पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज कर दी थी।
3 जुलाई: चंदौसी स्थित कोर्ट में नमाज पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई हुई।
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