चंदौसी(संभल)। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर के स्थानांतरण के विरोध में प्रदर्शन करने वाले 26 अधिवक्ताओं को उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सीजेएम ने 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और कोतवाल अनुज कुमार तोमर समेत 22 पुलिस कर्मियों खिलाफ एफआईआर के आदेश दिया था। इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का सुल्तानपुर स्थानांतरण हो गया था। इसके विरोध में वकीलों ने प्रदर्शन किया था।
बता दें कि तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बवाल में घायल हुए युवक के परिजन की शिकायत पर सीओ और कोतवाल समेत 22 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश किए थे। इसके बाद उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा सीजेएम का सुल्तानपुर स्थानांतरण कर दिया गया था। 21 जनवरी 2026 की सुबह कुछ अधिवक्ताओं ने जिला न्यायालय के गेट पर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया था। अधिवक्ताओं का कहना था कि न्यायिक अधिकारी विभांशु सुधीर अच्छा कार्य कर रहे थे। पुलिस के दबाव में हाईकोर्ट द्वारा उनका स्थानांतरण कर दिया गया।
सीजेएम न्यायालय के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने प्रदर्शन करने वाले 26 अधिवक्ताओं के खिलाफ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सीजेएम का स्थानांतरण हुआ था। उच्च न्यायालय के आदेश के मामले में किसी तरह का प्रदर्शन करने का कोई औचित्य नहीं था।
एडवोकेट जफर अली राजनीतिक विधानसभा में चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके चलते उन्होंने प्रदर्शन किया है। उच्च न्यायालय ने प्रदर्शन करने वाले अधिवक्ताओं को नोटिस दिए गए हैं। अब ये अधिवक्ता जिला न्यायाधीश के माध्यम से उच्च न्यायालय को जवाब देंगे।
वहीं एडवोकेट जफर अली का कहना है कि उच्च न्यायालय से नोटिस मिला है। मंगलवार तक का समय दिया गया है। सोमवार तक जवाब भेज दिया जाएगा।