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नोट बंदी से व्यापारियों को 200 करोड़ का फटका

Tue, 15 Nov 2016 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
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नकदी
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कारखानों में छुट्टी भरा माहौल है। लेबर को देने के लिए पेमेंट नहीं है। जिसे एक हजार रुपये दिए जाने हैं उसे 100-200 रुपये देकर काम चलाया जा है। 
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संभल के बाजारों में सन्नाटा छाया है। दुकानदार खाली बैठे हैं। कारखानों में लेबर के लिए पेमेंट नहीं है। मैंथा का 90 प्रतिशत माल कैश पर ही खरीदा जा रहा है जब कैश ही नहीं है तो किसान माल नहीं ला रहे हैं। पुराने माल से प्रॉसिसिंग हो रही है। जिनके पास पुराना माल भी नहीं है, उनकी निर्माण इकाइयों में उत्पादन ठप हो गया है। लेबर को घर जाने के लिए कह दिया गया। अब करेंसी आने का इंतजार है।  
प्रमुख कारोबारी और व्यापार मंडल के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय पोली ने बताया कि फिलहाल की स्थिति में न माल जा रहा है न रुपये आ रहे हैं। ऐसा कभी नहीं हुआ। लेकिन हमें उम्मीद है कि दिसंबर के बाद हमारा कारोबार रफ्तार पकड़ेगा। 
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मार्केट में सुधार की उम्मीद लेकर ही हम चुप हैं। वहीं दवा विक्रेता अवधेश वार्ष्णेय ने कहा कि दवाएं तो बेहद जरूरी होती हैं लेकिन तमाम लोग ऐसे हैं जो बड़े नोट होने की वजह से दवा तक नहीं               खरीद पा रहे है। कुछ लोग तो ऐसे आते हैं जो अपना 500 का नोट 400 रुपये में चलवाने तक की बात कहते हैं।


बाजार बिल्कुल खाली पड़ा है। एक-दिन में 75-80 ड्रम माल अकेले संभल मंडी में आता था। इतना ही माल चंदौसी मंडी में आता था। यानि एक दिन में करीब 2 करोड़ रुपये का मैंथा आयल किसान मंडी में लाते थे। इस समय तो दस पांच लाख का माल भी नहीं आ रहा है। चार दिनों में मैंथा इंडस्ट्री को करारा झटका लगा है। जो माल बाहर गया है उसका पेमेंट भी नहीं मिल पा रहा है क्योंकि पेमेंट बैंकों के माध्यम से आता है और बैंकों से कैश नहीं मिल पा रहा है। जिससे नया माल नहीं खरीद पा रहे हैं। कुल मिलाकर चार दिनों में अकेले मैंथा इंडस्ट्री को 20 करोड़ का झटका लग चुका है।   
- दीपक गुप्ता, मैंथा एसोसिएशन के सचिव।

संभल। छापों की अफवाह पर रविवार को सरायतरीन की पूरी मार्केट बंद हो गई थी। सोमवार को दुकानें खुलीं और माहौल सामान्य था लेकिन दोपहर दो बजे के करीब वाणिज्यकर विभाग के छापे की खबर मार्केट में फैल गई। इससे कई दुकानें बंद हो गईं। इसके बाद व्यापारियों ने अपने अधिवक्ताओं और विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली जब उन्हें पता लगा कि कोई छापा नहीं पड़ रहा है तो उन्होंने दुकानें खोल लीं और कारोबार शुरू हो गया।

भाजपा नेता ने वित्त  मंत्री को हालात से अवगत कराया
संभल। भाजपा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के विभाग संयोजक संजय सांख्यधर ने केंद्रीय वित्त मंत्री से फोन पर बातचीत की। उन्हें जनता की दिक्कतों से  अवगत कराते हुए कहा- एक बार में कम से कम 5000 रुपये की करेंसी का एक्सचेंज किया जाए। सात दिनों में 50,000 रुपये बैंक खाते से निकालने की छूट दी जाए। प्राइवेट मेडिकल स्टोरों को पुरानी करेंसी के नोट स्वीकार करने के निर्देश दिए जाएं। पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियों और सरकारी ड्यूज पुरानी करेंसी से जमा करने की छूट दस दिन के लिए बढ़ाई जाए। 

चार दिन में कम से कम कारोबार को 200 करोड़ रुपये का झटका लगा है। लेबर को देने के रुपये नहीं है। मुझे अपने कारखानों में लेबर को देने के लिए 1.5 लाख रुपये प्रति सप्ताह चाहिए होते हैं लेकिन मात्र दस हजार रुपये ही मिले हैं। 
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- हरीश गर्ग, एग्रीकल्चर        उपकरणों के निर्माता।  
जब से नोट बंद हुए हैं तब से करेंसी का फ्लो कम हो गया है। लेबर को एकाउंट में रुपये देने का प्रयास करते हैं तो दिक्कत की बात यह है कि किसी भी श्रमिक का बैंक खाता नहीं है। लोग परेशान हैं। उत्पादन प्रभावित है और कारखाने में छुट्टी का माहौल है। 
- सुहेल परवेज, हैंडीक्राफ्ट  आइटम के निर्यातक।


 
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