चंदौसी। बाजार में मंदी और कोरोना बंदी के कारण सरकारी केंद्रों पर गेहूं की बंपर खरीद हुई। किसानों ने भी अच्छे दाम के लिए गेहूं बेच दिया, पर उनका भुगतान अटक गया है। गेहूं खरीद के बाद 72 घंटे में भुगतान के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। जिले के किसानों का गेहूं मूल्य का 25.51 करोड़ रुपये बकाया है। कुछ किसान ऐसे हैं, जिनका गेहूं बेचने के एक माह बाद पैसा नहीं मिला है। अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारी शासन स्तर पर सत्यापन न होने की बात कहकर टरका रहे हैं।
संभल जनपद में करीब 1.20 लाख हेक्टेअर में गेहूं की फसल हुई थी। गेहूं खरीद के लिए 71 क्रय केंद्र निर्धारित किए गए थे। सात जून तक जिले में करीब 80 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। अभी किसान गेहूं लेकर क्रय केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। सरकार ने 72 घंटे में गेहूं मूल्य के भुगतान का दावा किया था। जिले में करीब 158.38 करोड़ रुपये का गेहूं मूल्य का भुगतान होना हैं, इसमें से अभी तक 132.77 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। करीब 18 फीसदी भुगतान बकाया है।
बाजार मंदी और कोरोना बंदी में हुई बंपर खरीद
हर साल संभल जनपद व आसपास के जनपदों से व्यापारी गेहूं की खरीदारी करके उत्तराखंड व अन्य जनपदों में बेचने जाते थे। बड़े किसान स्वयं भी उत्तराखंड गेहूं ले जाते थे। पर कोरोना के चलते प्रदेश का बॉर्डर पार करने में व्यापारियों को दिक्कतें आई और बाहर गेहूं नहीं जा सके। कोरोना बंदी के चलते बाजार में गेहूं की मंदी रही। 1550 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक किसानों से निजी व्यापारियों ने गेहूं खरीदा। इस कारण किसानों ने निजी व्यापारियों के बजाय सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचना अधिक मुनासिब समझा। वर्ष 2020-21 में संभल जनपद में मात्र 74 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी, जबकि इस वर्ष आठ जून तक ही 80 हजार मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है।