संभल। ओबरी, सैफ खां सराय और मुकर्रबपुर के लिए 697.17 लाख लागत से 2015 में पेयजल योजनाओं पर काम शुरू हुआ। पानी की टंकी बन गई और नलकूप भी लग गए लेकिन कहीं पाइप लाइन का काम अधूरा है तो कहीं दूसरी कमियों के कारण इन चार गांवों को 356.44 लाख रुपये व्यय करने के बाद पानी की पेयजल योजना से शुद्ध पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हो सकी।
वर्ष 2015 में इन तीन गांवों में पेयजल योजना के लिए काम शुरू हुआ था। एक वर्ष तक काम चला लेकिन जब धनराशि नहीं मिली तो 2016 में काम बंद हो गया। इसके बाद कार्यदायी संस्था जल निगम ने प्रति वर्ष धनराशि की मांग की पर आवंटन नहीं हुआ। ओबरी, सैफ खां सराय और मुकर्रबपुर में करीब 30 हजार लोगों को इस योजना से पानी नहीं मिला। योजना चालू न होने पर तमाम लोगों ने अपने स्तर से बोरिंग कराए लेकिन जिनके घर पर बोरिंग नहीं है, उनके पेयजल की अधिक परेशानी है।
योजना की का नाम लागत और व्यय (लाख रुपये में)
ओबरी ग्राम पेयजल योजना 248.13 157.96
सैफ खां सराय ग्रामीण पेयजल योजना 300.07 113.50
मुकर्रबपुर ग्राम पेयजल योजना 148.97 84.96
रतूपुरा में आधी अधूरी योजना चालू की गई
संभल। रतूपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना 2015 में 196.00 लाख रुपये की मंजूर हुई थी। इस पर 102.48 लाख रुपये व्यय हुए। योजना में नलकूप लगाए गए। पाइप लाइन बिछाई गई। पानी की टंकी भी बनी लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। जल निगम ने ग्रामीणों की मांग पर आधी अधूरी योजना चालू कर दी। जबकि ओबरी, सैफ खां सराय और मुकरर्बपुर की योजना से पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हुई है।
मल्टी सेक्टोरल डेवलेपमेंट स्कीम के तहत यह पेयजल योजनाएं बनाईं जा रहीं थीं लेकिन धनराशि का आवंटन न होने से काम रुक गया था। अब मैंने 24 फरवरी को शासन से धनराशि आवंटन का आग्रह किया है। संजीव रंजन, जिलाधिकारी
मैंने धनराशि की मांग करते हुए जल निगम मुख्यालय को पत्र भेजा है। अब धनराशि आवंटित होने का इंतजार किया जा रहा है। मुकेश कुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता, जल निगम