संभल। बहजोई के पास रविवार सुबह 10 सवारियों से भरे तीन सीटर ऑटो के हादसे में मासूम भाई-बहन समेत छह लोगों की जान चली गई थी। तीन लोगों की क्षमता वाले ऑटो में 10 सवारियों की घुसपैठ का मामला सामने आने के बाद भी सोमवार को इसकी पुनरावृत्ति रोकने के कोई प्रयास नहीं हुए। ट्रैफिक पुलिस की ओर से चालान तो दूर चेकिंग तक नहीं हुई।
जिले में संवाद टीम ने सोमवार को ऑटो में सवारियों की स्थिति और संख्या की पड़ताल की तो कई स्थानों पर चौंकाने वाले उदाहरण सामने आए। विभिन्न चौराहों पर ऑटो तो अलग-अलग थे लेकिन हर जगह प्रति ऑटो सवारियों का औसत 10 या इससे ज्यादा था। चौंकाने वाली बात यह भी थी कि कुछ स्थानों पर सवारियां भरते ऑटो चालकों से थोड़ी दूरी पर ही ट्रैफिक पुलिस मौजूद थी। इनके रास्तों पर चौकी, ट्रैफिक बूथ भी पड़े लेकिन ओवरलोड ऑटो बेधड़क आगे बढ़ते रहे।
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ओवरलोडिंग से पहले चालक और फिर वाहन होता है असंतुलित
रविवार को ऑटो सवार छह लोगों की हादसे में मौत के पीछे पहली नजर में ऑटो के आगे चल रही दिव्यांग की ट्राईसाइकिल के अचानक यूटर्न को कारण माना गया। बताया गया कि ट्राईसाइकिल को बचाने की कोशिश में असंतुलित होकर ऑटो सामने से आ रहे डंपर से टकरा गया था। इसके बाद पूरे घटनाक्रम को विशेषज्ञों द्वारा बारीकी से देखा गया तो स्पष्ट हुआ कि ऑटो की ओवरलोडिंग भी हादसे का बड़ा कारण थी।
मोटर ड्राइविंग स्कूल से जुड़े जानकार बताते हैं कि अपनी सीट पर भी सवारियां एडजस्ट कर लेने के कारण ऑटो चालक न खुद ढंग से बैठ पाते हैं और न ही सधी हुई ड्राइविंग के हिसाब से अपने हाथ-पांव चला पाते हैं। नतीजे में आसपास गुजरते वाहनों की गतिविधि में मामूली सा बदलाव साध पाने के बजाय चालक अपने वाहन से नियंत्रण खो बैठता है। लिहाजा जिम्मेदारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऑटो से लेकर अन्य वाहनों में क्षमता से ज्यादा सवारियां न बैठाई जाएं। चालक अपनी सीट पर सहज ढंग से बैठें और नशे में न हों। वाहन की फिटनेस की समयबद्ध चेकिंग होती रहे।
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सीन- 1
स्थानः संभल का चंदौसी चौराहा
समयः दोपहर 1.40 बजे
नजाराः
चंदौसी जाने के लिए तीन ऑटो आगे-पीछे खड़े थे। सबसे आगे वाले ऑटो का चालक चंदौसी-चंदौसी... की आवाज लगाते हुए सवारियां बैठा रहा था। देखते-देखते छह सवारी ऑटो में आ गईं। इनके साथ मौजूद बच्चे चालक ने सवारियों के आगे खड़े कर दिए। करीब 20 मिनट में ऑटो में बच्चों समेत 15 सवारी एडजस्ट कर दी गईं। तीन सवारियों के लिए मान्य ऑटो में यह मनमानी जिस स्थान पर चल रही थी, वहां से यातायात पुलिस लगभग 20 मीटर दूर थी। यही नहीं संभल से चंदौसी की दूरी 25 किलोमीटर है। इस रास्ते में नूरियो सराय पुलिस चौकी के साथ-साथ मोहम्मदपुर टांडा, नरौली आदि चौकियां भी ऑनरोड हैं। चंदौसी शहर में उस तिराहे पर यातायात पुलिस रहती है, जहां संभल से आने वाले ऑटो सफर पूरा करते हैं। लेकिन ऑटो को कहीं रोकना तो दूर टोका तक नहीं गया।
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सीन- 2
स्थानः संभल में चौधरी सराय
समयः दोपहर 2.14 बजे
नजाराः
गवां जाने के लिए दो ऑटो खड़े थे। पहले नंबर पर खड़े ऑटो चालक ने गवां की आवाज लगाई तो कुछ सेकेंड में चार यात्री आ गए। चालक ने उन्हें बीच की सीट पर आड़ा-तिरछा बैठा दिया। फिर मुख्य सीट पर चार यात्रियों को बैठाया गया। यही नहीं दुबले-पतले तीन लोग चालक ने अपने बराबर में सेट किए। पीछे लगे लकड़ी के पटरे पर भी दो सवारियां एडजस्ट की गईं। 15 मिनट में इतनी कवायद करके ऑटो गंवा की ओर दौड़ा दिया। इसके बाद इस ऑटो के पीछे खड़े चालक ने अपना वाहन आगे कर दिया।लगभग इसी प्रक्रिया को दोहराकर सवारियों को ले गया। यहां ऑटो और ड्यूटी पर खड़े यातायात पुलिसकर्मियों के बीच की दूरी महज 100 मीटर थी।
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सीन- 3
स्थानः गवां का संभल चौराहा
समयः दोपहर 4.20 बजे
नजाराः संभल जाने के लिए तीन ऑटो कतार में खड़े थे। पहले नंबर वाले चालक ने परंपरागत ढंग से आवाजें लगाईं तो संभल जाने वाले आते गए और उन्हें पहले सीटों पर बैठाया। इसके बाद आने वालों को ऑटो के खाली स्थानों पर पहले से की हुई जुगाड़ जैसी व्यवस्था में सेट किया गया। करीब 20 मिनट में 12 यात्रियों को इस ऑटो में भरा गया। इस ऑटो के संभल का रुख करते ही दूसरे नंबर पर खड़े ऑटो ने यही तरीका अपनाया। इस चौराहे पर उस वक्त यातायात पुलिस नहीं थी लेकिन गवां से संभल तक गंगा एक्सप्रेसवे पुलिस चौकी, शकरपुर पुलिस चेकपोस्ट और खिरनी पुलिस चौकी पड़ती है फिर भी इस तरह के ऑटो अपने अंदाज से दौड़ते रहे।
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सीन- 4
स्थानः बहजोई में इस्लामनगर चौराहा
समयः दोपहर 2.45 बजे
नजाराः चंदौसी जाने के लिए ऑटो कतारबद्ध खड़े थे। पहले नंबर पर खड़े ऑटो चालक ने चंदौसी जाने के लिए तेज आवाज लगाई। पहले चार लोग आकर बैठे और फिर 15 मिनट में पूरा ऑटो वैसे ही भरा गया जैसे 10 या इससे ज्यादा सवारियों के जुगाड़ के लिए ऑटो वाले भरते हैं। चालक चंदौसी के लिए रवाना हो गया। हैरानी की बात यह है कि इस स्थान से 20 मीटर की दूरी पर यातायात पुलिस का बूथ भी है। पुलिसकर्मी तैनात भी रहते हैं लेकिन ऑटो अपने तरीके से चलते हैं।
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सिस्टम पर भारी बिचौलिया और मुंशी
साधारण पृष्ठभूमि वाले लोगों को इधर से उधर जाने में ऑटो अथवा ई-रिक्शा बड़ा सहारा हैं। इनकी सहज उपलब्धता और कम किराया लोगों की निर्भरता का बड़ा कारण है। साथ ही इनकी दौड़ उन रूटों पर भी है, जहां बसें नहीं चलतीं या इक्का-दुक्का ही चलती हैं।
लिहाजा देखते-देखते सड़कों पर ऑटो और ई-रिक्शा का नेटवर्क तेजी से बढ़ा है। इस बढ़त ने इस यातायात सेवा में पुराने दौर की प्राइवेट बस सर्विस जैसे मुंशी और बिचौलिया के किरदार भी पैदा हो गए हैं। ये दोनों किरदार सड़क किनारे के किसी खाली स्थान को ऑटो स्टैंड की तरह इस्तेमाल करके उस रूट के ऑटो के आने-जाने का क्रम तय करते हैं। इसे ऑटो का नंबर लगाना कहा जाता है। हादसा होने या चेकिंग में फंसने वाले ऑटो चालकों की पैरोकारी में भी आगे आते हैं। इसके एवज में ऑटो वालों से महीनेबंदी के रूप में मासिक भुगतान तय रहता है। चूंकि ऑटो और ई-रिक्शा रोकने या खड़े करने का कोई स्थान सरकारी या निकाय स्तर से तय है नहीं, लिहाजा इन मध्यस्थों की चांदी रहती है। चर्चा तो यहां तक भी है कि इस तरीके से होने वाली वसूली का कुछ हिस्सा उन कर्मचारियों पर भी खर्च किया जाता है, जो इन्हें रोकने या टोकने के लिए हैं।
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यातायात प्रभारी बोले, अभियान चलाकर सीज करेंगे वाहन
बड़े हादसे के अगले दिन भी ऑटो में क्षमता से ज्यादा सवारियों ढोई जाने के सवाल पर यातायात पुलिस के प्रभारी जगरोशन सिंह ने कहा कि हमारी टीमें जब ऑटो के आसपास होती हैं तो चालक मानक के हिसाब से ही यात्रियों को बैठाते हैं। अब हम विशेष अभियान चलाकर उन ऑटो को सीज करने की कार्रवाई करेंगे, जिनमें ओवरलोडिंग मिलेगी। वैसे चेकिंग की कार्रवाई लगातार की जा रही है।
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परिवहन टीम ने की चार पर कार्रवाई
परिवहन विभाग की टीम ने सोमवार को चेकिंग की। एआरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी ने बताया कि इस दौरान 30 वाहन चेक किए गए। चार ऑटो के खिलाफ क्षमता से ज्यादा यात्री ले जाने के मामले में कार्रवाई की गई है। विशेष अभियान चलाकर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। ऑटो में तीन यात्री लेकर जाने की ही अनुमति है।
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बहजोई के पास हादसे में ऑटो सवार इन लोगों की गई थी जान-
बहजोई थाना क्षेत्र के गांव सादातबाड़ी निवासी ऑटो चालक श्यौदान (40), मोहल्ला कुरैशी निवासी रूबैद (25), बदायूं जिले के थाना फैजगंज बेहटा अंतर्गत गांव परमानंदपुर निवासी रोहिणी (30), चंदौसी के मोहल्ला हनुमानगढ़ी निवासी दीपक उर्फ तरुण के सात वर्षीय बेटे ध्रुव और तीन महीने की बेटी सर्वाध्या और धनारी थाना क्षेत्र के गांव जड़वार निवासी रामपाल (35) की जान गई थी।
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इन लोगों का चल रहा है उपचार-
चंदौसी के मोहल्ला हनुमानगढ़ी निवासी दीपक उर्फ तरुण की पत्नी भावना, बदायूं के थाना फैजगंज बेहटा अंतर्गत परमानंदपुर निवासी पुनीत, बनियाठेर थाना क्षेत्र के गांव नेहटा निवासी ब्रजकिशोर और बहजोई थाना क्षेत्र के गांव मऊ कठेर निवासी प्रशांत घायल हैं। इनका उपचार चल रहा है। इस हादसे में ही ट्राईसाइकिल से जा रहे दिव्यांग रजपुरा थाना क्षेत्र के गांव सेमरी निवासी बिट्टू भी घायल हैं।