गवां स्थित शहीद गिरीश चौक में कवियों की महफिल सजी। नव संवत्सर के उपलक्ष्य में आयोजित कवि सम्मेलन में काव्य रचनाओं का हर रंग देखने को मिला। मोहब्बत के अफसाने थे तो देशभक्ति के तराने भी।
काव्य पाठ की शुरूआत पीके आजाद ने मां सरस्वती की वंदना से की। देहरादून के श्रीकांतश्री की ‘भले ही दीप से पूजा तू आठों याम मत करना, मिले कोई मोहल्ले में तू राधे श्याम मत करना, नमन करना या मत करना कोई कुछ न कहेगा पर शहीदों की शहादत को कभी बदनाम मत करना’ पंक्तियों ने देशभक्ति का तराना छेड़ दिया तो दर्शक ताली बजाने को मजबूर हो गए।
नैनीताल के कवि मोहन मुंतजिर से सभी श्रोताओं को अपनी पंक्तिओं में इस कदर डुबोया कि लोग आनंदित हो उठे। उन्होंने सुनाया कि ‘न जब तक मुस्कुराए वो उसे मुस्कान मत देना, पलटकर खुद ही देखेगी तुम उस पर ध्यान मत देना।’ पानीपत के हास्य कवि योगेंद्र मुदगिल ने अपनी रचना ‘भ्रष्ट राजनीति हो गई, चौपट हुआ समाज, हर वानर को चाहिए किष्किंधा का राज’ से राजनीति पर कटाक्ष किया। अनिल शर्मा गवां ने पढ़ा कि ‘रिश्वत लेने वालों तुमको एक संदेशा देता हूं, अपने बच्चों का पेट काट मैं तुमको रिश्वत देता हूं।’
अरुण दीक्षित ने कहा जहर उगलो कलम से गर मर्द हो, गीत लिखो ऐसा जिसमें दर्द हो। बहजोई के सौरभकांत शर्मा ने मंच का संचालन करते हुए कहा कि जब मैं कॉलेज में पढ़ता था, अक्सर प्यास लगा करती थी, खास गणित के घंटे में ही शंका खास लगा करती थी।
इसके अलावा मुंबई के बाल कवि चेतन चर्चित, पिलखुआ से राधिका मित्तल व पीके आजाद ने भी अपनी-अपनी जोरदार रचनाओं से सामाजिक व राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाये और लोगों को कुर्सी पर जमे रहने के लिए मजबूर किया। देररात तक दर्शक कवि सम्मेलन का आनंद उठाते दिखे। मुख्य अतिथि संघ के जिला प्रचारक बबराला कपिल और चेयरमैन अखिलेश अग्रवाल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरगोविंद शर्मा ने की।