संभल। शहर के मियां सराय निवासी मुस्लिम परिवार के हाथ से तैयार रावण और मेघनाद के पुतले का दहन भगवान श्रीराम द्वारा दशहरा पर किया जाता है। इससे जहां एक तरफ सौहार्द की मिसाल पेश होती है। वहीं धर्म और नफरत की दीवार भी टूट जाती है। यह परिवार दशहरा से डेढ़ महीने पहले से काम शुरू करता है। ऑर्डर पहले ही मिल जाते हैं। 20 से 40 फीट ऊंचाई के पुतले तैयार होते हैं। यह परिवार मुहर्रम पर ताजिये भी तैयार करता है।
मियां सराय निवासी आसिफ हुसैन ने बताया कि उनका परिवार 50 वर्ष से हर साल रावण और मेघनाद के पुतले तैयार करता है। चार वर्ष पहले तक उनके पिता शाहिद इस काम को संभालते थे। उनके निधन के बाद आसिफ ने यह जिम्मेदारी उठा ली है। पूरा परिवार लगकर रावण और मेघनाथ के पुतले तैयार करता है।
आसिफ ने बताया कि हमारे पिता के उस्ताद कल्लू पुतले तैयार करते थे। उनके साथ ही पिता ने काम सीखा और वर्षों तक काम किया। उस्ताद कल्लू का निधन हो गया तो पिता ने पूरी तरह काम को संभाला था। बताया कि चार वर्ष पहले उनके पिता का भी निधन हो गया। तब से पूरा परिवार यह जिम्मेदारी संभाल रहा है।
आसिफ ने बताया कि वे पुतले बनाने का काम करीब डेढ़ महीने पहले शुरू कर देते हैं। यह उनके लिए रोजगार का साधन है, जिससे आपसी भाईचारा भी दिखाई पड़ता है। उनके हाथ से बने पुतलों की मांग अपने जिले के अलावा आसपास के कई जिलों से रहती है। दशहरा आने से करीब दो महीने पहले से ही पुतलों के ऑर्डर आने शुरू हो जाते हैं। ग्राहक अपनी पसंद की ऊंचाई के पुतले बुक करा जाते हैं।