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चुप ताजिये के जुलूस के साथ शिया समुदाय में शोक समाप्त

सार

हजरत इमाम हुसैन के गम के अंतिम दिन सिरसी, नूरियो सराय और बुकनाला में चुप ताजिये का जुलूस अकीदत और एहतराम के साथ गमगीन माहौल में निकाला गया।जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ इमाम बारगाह कला गर्बी पहुंचा।
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Mourning ends in Shia community with silent procession - फोटो : SAMBHAL
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विस्तार
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हजरत इमाम हुसैन के गम के अंतिम दिन सिरसी, नूरियो सराय और बुकनाला में चुप ताजिये का जुलूस अकीदत और एहतराम के साथ गमगीन माहौल में निकाला गया। जिस तरह से शाही जरी के जुलूस को मोहर्रम का आगाज माना जाता है। उसी तरह से चुप ताजिये को मुहर्रम के खत्म होने का ऐलान माना जाता है। जुलूस कड़ी सुरक्षा के बीच निकाला गया।
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कस्बा सिरसी में चुप ताजिया का जुलूस एहतराम के साथ निकाला गया। नबी-ए-करीम को उनके नवासे हजरत इमाम हुसैन का पुरसा दिया। अजाखाना शाहिद हुसैन में आयोजित मजलिस में मरसिया खावर रजा व उनके साथियों ने पढ़ा। जबकि मजलिस को मौलाना शबाहत मेहंदी ने संबोधित किया। कहा कि इस दिन हजरत इमाम हुसैन की बहन जनाबे जैनब और उनके बेटे हजरत जैनुल आबेदीन अपने परिवार के साथ मदीने पहुंचे और रसूले खुदा की कब्र पर पहुंच कर कर्बला में हुए जुल्मों को बयान किया। जिसे सुनकर अजादारों की आंखों नम हो गईं। मजलिस के बाद चुप ताजिये का जुलूस बरामद हुआ जुलूस में शबीये जुलजुनाह, अमारी और अलम मुबारक रहे। जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ इमाम बारगाह कला गर्बी पहुंचा। वहीं असमोली के गांव बुकनाला सादात में अमारी का जुलूस निकाला गया। इसके साथ ही शिया समुदाय से मुहर्रम का गम और शोक समाप्त हो गया।
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