संभल। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से आयोजित 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में तीसरे दिन बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने आहुति दी। सभी ने उज्जवल भविष्य के लिए लोक कल्याण के साथ प्रार्थना की। इस दौरान 200 से अधिक लोगों ने बुराई छोड़ने का संकल्प लिया। साथ ही, 50 से अधिक लोगों ने दीक्षा ली। उन्हें जनेऊ पहने के नियम बताए गए।
खिरनी मोहिउद्दीनपुर में आयोजित 24 कुंडीय महायज्ञ में गायत्री परिवार व क्षेत्रीय श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां दीं। यज्ञ वेदी के समक्ष बैठाकर जनेऊ और दीक्षा संस्कार कराया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ की शुरूआत हुई। शक्ति पीठ के साधकों ने पीत वस्त्र धारण किए। श्रद्धालुओं को विधिवत रूप से यज्ञ में आहुति दिलवाई। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख शांति और राष्ट्र कल्याण के लिए कामना की। साथ ही, पूर्ण आहुति में अपने अवगुणों का त्याग करने का संकल्प लिया। इस दौरान गायत्री मंत्रों के उच्चारण से पंडाल गूंज उठा। इस दौरान यशपाल सिंह दक्ष ने कहा कि गायत्री मंत्र चारों वेदों का सार है। वेदों में पहले ही लिख दिया कि संभल की पावन भूमि पर भगवान अवतार लेंगे और पापियों का अंत होगा। इसलिए अपने अंदर फैली कुरीतिओं को दूर कर भगवान के ध्यान में लग जाएं। अगर समय कम हो तो सोते समय गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए सोने के प्रयास करें। युवाओं से आह्वान किया कि मोबाइल का सदुपयोग करें। इस दौरान टोली नायक ओमेश्वर आदि रहे।