पिछले दस दिन मैंथा बाजार के लिए भी सर्द रहे हैं। दस दिनों में करीब 400 रुपये प्रति किलो का बाजार को झटका लगा है। वहीं मैंथा व्यापारी और निर्यातक भी समझ नहीं पा रहे हैंकि आखिर, इतनी जबरदस्त गिरावट क्यों आई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में मैंथा की डिमांड लगातार बनी हुई है। निर्यातकों का मानना हैकि यह झटका सट्टेबाजी के कारण हो सकता है लेकिन उम्मीद हैकि भविष्य में मैंथा के भावों में तेजी दिखेगी।
अंतरराष्ट्रीय मैंथा बाजार में जो डिमांड दस दिन पहले थी, कमोवेश वही स्थिति आज भी है, तो फिर भावों में डाउनफाल कहां से आया है ? यह बात बाजार समीक्षकों की भी समझ में नहीं आ रही है लेकिन इतना तो सच हैकि पिछले हफ्ते से लगातार मैंथा के भावों में गिरावट दर्ज की जा रही है। चार दिसंबर को भाव 2000 रुपये प्रति किलो को पार कर गए थे, किसानों का भाव भी 1900 रुपये तक पहुंच गया था लेकिन इसके अगले दिन से ही भावों में लगातार गिरावट आने शुरू हो गई, जो अभी भी रुक नहीं रही है। आलम यह हैकि बाजार रोजाना 50 रुपये तक टूटता जा रहा है।
शनिवार को सप्ताह के अंतिम दिन किसान भाव 1550 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। जिससे मैंथा बाजार में भी शीतलहर दिखने लगी है। बिकवाली भी प्रभावित हो रही है, किसानों व भड़सालियों ने भी वास्तविक कारोेबार को ब्रेक लगा दिए हैं। जिससे बाजार ठंडा नजर आने लगा है। लेकिन मैंथा व्यापारियों को उम्मीद हैकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मैंथा की मांग लगातार बने रहने के कारण गिरावट अधिक दिन नहीं टिक सकेगी। बाजार शीघ्र ही संभल सकता है।
-संभव हैकि यह एमसीएक्स पर सट्टेबाजी का असर हो या फिर कोई अन्य कारण, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में मैंथा की मांग जस की तस ही है, इसलिए यह कहना कठिन हैकि पिछले सप्ताह से लगातार मैंथा भावों में गिरावट क्यों आ रही है। लेकिन यदि यह दौर और चला तो 100 रुपये गिरावट और हो सकती है लेकिन इसके बाद बाजार के संभलने की पूरी उम्मीद है।
-अंकुर अग्रवाल मैंथा निर्यातक चंदौसी