किसानों से सुविधादाता के हाथों बैंक के फील्ड अफसर ने वसूली करा ली। यह आरोप लगाते हुए किसानों ने प्रथमा बैंक की नूरियोसराय शाखा में शनिवार को दोपहर हंगामा किया। बैंक में अफरातफरी मच गई। शाखा प्रबंधक ने जांच कराने का भरोसा देकर किसी तरह से किसानों को समझाया तब कहीं जाकर हंगामा शांत हो सका।
संभल जिले की नूरियोसराय शाखा में दोपहर आसपास के गांवों के कई किसान पहुंच गए। किसानों ने बताया कि ऋण माफी के बाद ब्याज के रुपये जमा कराने के लिए उनसे अतिरिक्त शुल्क मांगा जा रहा है। इस शुल्क के न देने पर उन्हें परेशान किया जाता है। उनसे कहा जाता है कि यदि सुविधा शुल्क नहीं दिया तो आपको अपात्र ठहरा देंगे और कर्जमाफी का रुपया वापस हो जाएगा।
एक किसान ने बताया कि बैंक में किसानों से चार-चार हजार रुपये की अवैध वसूली गई है। एक किसान ने कहा कि 15 दिसंबर को 10 हजार रुपये लिए गए हैं। इसी मामले भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता दीपक शर्मा बैंक पहुंचे और सख्त रुख अपनाया। इस पर सुविधादाता ने तीन किसानों के 12,000 रुपये लौटा दिए।
इसके बाद दीपक शर्मा ने मीडिया को बुला लिया और मीडिया के सामने सुविधादाता ने कहा कि फील्ड अफसर ने उससे वसूली कराई थी। जबकि फील्ड अफसर ने सबके सामने ही आरोप को गलत ठहराया। इस पर भाकियू नेता दीपक शर्मा ने मीडिया से कुछ किसानों से बातचीत कराई। जिनका कहना था कि उनसे भी सुविधा शुल्क लिया गया है।
इस बारे में बैंक के फील्ड अफसर ने कहा कि 31 मार्च 2017 तक के बकाया में एक लाख रुपये सरकार ने माफ किए हैं। जिस तिथि में सरकार ने माफी की रकम भेजी 31 मार्च 2017 से उस तिथि तक का ब्याज किसानों के लिए देय है। वही रुपया किसानों से जमा कराया गया है। लेकिन किसानों को आमतौर पर गलतफहमी है कि सुविधाशुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर तथ्यों की जांच हो जाए सही बात स्पष्ट हो जाएगी।
फील्ड अफसर निर्दोष पर मैं करा रहा हूं जांच: शाखा प्रबंधक
संभल। बैक के शाखा प्रबंधक निर्दोष कुमार ने अपने फील्ड अफसर को निर्दोष बताया। साथ ही कहा कि वह जांच कर रहे हैं ताकि हकीकत साफ हो सके। इस मामले में बैंक के सुविधादाता का नाम आया है। मैं पूरे प्रकरण की हकीकत सामने लाऊंगा।
मुझसे क्रेडिट कार्ड दोबारा बनवाने के लिए पांच हजार रुपये मांगे गए। इस मामले में जांच की जाए।
असलम पुत्र अहमदउल्ला गोविंदपुर बैंक के ग्राहक और किसान।
लोन माफी के नाम पर चार चार हजार रुपये लिए गए हैं। सिर्फ तीन चार सौ रुपये मुझे मिलते थे।
अनिल, सुविधादाता।
इस मामले का बैंक से कोई लेनादेना नहीं है। सुविधादाता और किसान के बीच लेनदेन से हमें क्या मतलब है। इनके बीच क्या लेनदेन हुआ है हमें नहीं पता है लेकिन मुझे जो बताया गया है उसके हिसाब से सुविधादाता ने खाता बंद करते वक्त किसान को 12,000 रुपये दिए थे, वही रुपये किसान लौटा रहा था।
कांतिमणि, फील्ड अफसर।
कई शाखाओं में हुई है वसूली, हो जांच
संभल। प्रथमा बैंक की कुछ शाखाओं में ऋण वितरण और कर्जमाफी के मामले में किसानों से वसूली हुई है। यह आरोप लगाते हुए भाकियू के मंडल महासचिव संजीव गांधी ने कहा कि प्रकरण एक शाखा का नहीं है। किसान आएदिन उनसे शिकायत करते हैं। इसलिए अब गोपनीय जांच कराए जाने की जरूरत है।
किसी भी बैंक में वसूली की गई तो भाकियू करेगी विरोध
यदि किसी बैंक में किसानों से अवैध वसूली की जाती है तो भाकियू विरोध करेगी। किसानों को चाहिए कि किसी तरह का अतिरिक्त पैसा न दें। भाकियू पदाधिकारियों को अवगत कराएं। ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
दीपक शर्मा, भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता।