चंदौसी/संभल। संभल जिले में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोला जाना है। इसके लिए शासन-प्रशासन अब 15 एकड़ जमीन तलाश रहा है क्योंकि संभल उन जनपदों में शामिल है जहां अभी तक कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है। शासन ने मेडिकल कालेज के मामले में संभल को असेवित जनपद की सूची में शामिल किया है। इस सूची में संभल समेत कुल 16 जनपद हैं। इन सभी जनपदों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर मेडिकल कालेज खुलेंगे।
उत्तर प्रदेश शासन के उप सचिव अनिल कुमार सिंह ने पंद्रह जनपदों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री ने असेवित जनपदों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। इनके पालन में सभी जनपदों में 15-15 एकड़ जमीन तलाशी जाए। इस काम में कोई देरी न करें क्योंकि मुख्य सचिव इस काम की समीक्षा करेंगे। इस पत्र की प्राप्ति के बाद संभल जिले में भी जमीन की तलाश हो रही है।
जमीन की तलाश संभल के दस किलोमीटर दायरे में हो रही है। असल में संभल में ही जिला अस्पताल है। पत्र में यह साफ तौर पर स्पष्ट किया गया है कि जमीन को जिला अस्पताल के दस किलोमीटर की परिधि में तलाशा जाए। जमीन भी कम से कम पंद्रह एकड़ हो। अगर जमीन मिल गई तो पीपीपी माडल पर मेडिकल कालेज बनने का रास्ता साफ हो जाएगा और संभल जिले की जनता के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।
इन जनपदों में नहीं है कोई मेडिकल कालेज
संभल। पड़ोसी मुरादाबाद, बदायूं और बरेली जनपद में मेडिकल कॉलेज हैं पर संभल में मेडिकल कॉलेज नहीं है। बागपत, बलिया, भदोही, चित्रकूट, हमीरपुर, हाथरस, कासगंज, महाराज गंज, महोबा, मैनपुरी, मऊ, रामपुर, संतकबीरनगर, शामली और श्रावस्ती भी उन जनपदों में हैं जहां सरकारी और गैरसरकारी किसी भी तरह का कोई मेडिकल कालेज नहीं है। शासन ने इन सभी जनपदों को असेवित की श्रेणी में डालकर पीपीपी माडल के लिए चुना है। प्रक्रिया भी शुरू कराई है।
पहली प्राथमिकता सरकारी जमीन को मिलेगी
संभल। सरकारी जमीन नहीं मिली तो फिर सरकार को जमीन खरीदनी पड़ेगी। इसके लिए सर्किल रेट से चार गुना भुगतान करना होता है। इसीलिए पहली प्राथमिकता ग्राम पंचायत की भूमि या किसी सार्वजनिक संपत्ति को है जो पहले से राज्य सरकार के पास है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही संभल तहसील का राजस्व विभाग जमीन तलाश रहा है।