संभल जिले में ब्लैक फंगस का पहला मामला सामने आया है। इससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। ब्लैक फंगस की चपेट में आए खाद प्लांट के कर्मचारी का उपचार दिल्ली के अपोलो अस्पताल में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मरीजों की सूची बनानी शुरू कर दी है जो कोरोना संक्रमण के दौरान कहीं बाहर के अस्पताल में भर्ती होकर लौटे हैं।
संभल जिले में बबराला स्थित यारा वेरा फर्टिलाइजर प्लांट में कार्यरत 47 वर्षीय व्यक्ति में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. मनोज चौधरी के मुताबिक दस अप्रैल को इस व्यक्ति में कोरोना का संक्रमण पाया गया था। इसके बाद वह उपचार कराने के लिए दिल्ली के एक अस्पताल में गए थे। अप्रैल के तीसरे सप्ताह में रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी और सेहत में सुधार हो गया था।
इसके बाद वह यारा वेरा फर्टिलाइजर कैंपस लौट आए थे। 21 मई को अचानक सेहत बिगड़ी और चेहरे पर दर्द होने लगा। सीटी स्कैन कराया तो ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई दिए। इसके बाद दिल्ली के अपोलो अस्पताल में जांच कराई गई, जिसमें ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। वहीं इलाज चल रहा है। सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि जिले में ऐसे अन्य लोग भी हैं, जो बाहर से उपचार कराकर लौटे हैं। ऐसे सभी लोगों की सूची बनाई जा रही है और शुक्रवार को सभी से संपर्क कर जांच कराई जाएगी। जिन लोगों में लक्षण दिखाई देंगे उनकी ब्लैक फंगस जांच के लिए नमूना लैब भेजा जाएगा।
फर्टिलाइजर परिसर में निकले थे दो सप्ताह में 50 से ज्यादा संक्रमित
यारा वेरा फर्टिलाइजर कैंपस में अप्रैल के पहले सप्ताह से दूसरे सप्ताह तक 50 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज मिले थे। यह वे लोग थे जो दूसरे शहरों या गांवों में होली मनाने के बाद कैंपस लौटे थे। कैंपस के कई कर्मचारी और अधिकारियों ने संक्रमण से जान भी गंवाई है। अब ब्लैक फंगस का पहला मामला सामने आने से सभी की चिंता बढ़ गई है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. मनोज चौधरी ने कहा कि परिसर में शुक्रवार की सुबह से संदिग्ध महसूस होने वालों की जांच कराई जाएगी।