वह नोटबंदी के फैसले का विरोध भी नहीं कर रहे हैं और ना ही किसी सरकार से कोई नाराजगी जाहिर कर रहे हैं लेकिन उन्होंने अपना कारोबार ठप कर दिया है। ऐसा उन्होंने खुदरा करेंसी नहीं होने और होने वाले विवादों से बचने के लिए किया है। जिससे सोमवार को अनाज बेचने आए किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा है।
1000 व 500 रुपये के नोट बंद होने का प्रभाव जिले की सभी कृषि उत्पादन मंडी समितियों पर पड़ रहा है। मंडी समितियों का कारोबार लगभग चौपट हो गया है। सबसे अहम समस्या यह है कि खाद्यान्न लेकर आने वाले किसानों को देने के लिए कोई खुदरा करेंसी उपलब्ध नहीं है। नई करेंसी अभी मिल नहीं रही है। ऐसे में अनाज की खरीद के लिए किसानों को कौन सी मुद्रा दी जाए। यही समझ में नहीं आ रहा है। छोटी करेंसी न देने पर किसान विवाद भी करने लगे हैं। पल्लेदारों को मजदूरी देने के लिए भी खुले रुपये नहीं हैं। ऐसे में किसान व व्यापारी में झगड़े के आसार बने रहते है। सोमवार को मंडी व्यापार संघ के बैनर तले गल्ला मंडी के आढ़तियों ने अपना कारोबार बंद कर दिया है।
हालांकि सभी ने अपने प्रतिष्ठान खोले लेकिन कोई खरीद फरोख्त नहीं की। व्यापार मंडी संघ के अध्यक्ष अभिमन्यु बंसल व मंत्री अनुराग मित्तल ने बताया कि किसान आठ नवंबर को जो भुगतान ले गया है। वह भी छोटे नोट में बदलना चाह रहा है। भविष्य में किसान व व्यापारियों को कोई परेशानी न हो, इसीलिए मंडी के सभी व्यापारियों ने अपना व्यापार कार्य स्थगित कर दिया है। लेकिन हम नोटबंदी के निर्णय का विरोध नहीं कर रहे हैं। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि वह व्यापारियों को अलग से काउंटर खुलवाकर नई करेंसी दिलाएं। साथ ही किसानों को खाद, बीज व हजार व पांच सौ के नोट बदलवाने की व्यवस्था करें। जिससे किसान के सामने नई फसल की बुआई में परेशानी न आए। व्यापार कार्य बंद रखने वालों में कपिल बंसल, भुवनेश कुमार, राधेश्याम गुरु, विपिन कुमार, राकेश कुमार, अशोक कुमार, अमित चौहान, सुशील, अंशु, जानी, कांताप्रसाद, मनोज शामिल रहे।
चंदौसी। दूरदराज के किसानों को मंडी समिति स्थित गल्ला मंडी में कारोबारी हड़ताल की जानकारी नहीं थी। जिससे वह परेशान रहे। मंडी समिति में तहसील क्षेत्र के अलावा बदायूं, रामपुर जनपदों के काफी गांव के किसान अपनी फसल बेचने चंदौसी मंडी में ही आते हैं। सोमवार को काफी संख्या में किसान धान व उड़द लेकर पहुंचे। लेकिन जब आढ़त बंद देखी तो मायूस होना पड़ा । ऐसे में अधिकतर किसानों को अपना खाद्यान्न वापस ले जाना पड़ा।
चंदौसी। मंडी समिति स्थित गल्ला मंडी में फसल के दिनों में प्रतिदिन करीब 10 लाख का कारोबार होता है। हालांकि नोटबंदी के चलते इसमें भारी गिरावट आई है। मंडी व्यापार संघ अध्यक्ष अभिमंयु बंसल बताते हैं कि गल्ला मंडी में करीब 80 दुकानें कच्चे आढ़तियों की हैं। फसल आने पर मंडी में प्रतिदिन करीब 10 लाख का कारोबार होता है। अभी धान व उड़द की फसल आना शुरु हुई थी कि एक हजार व पांच सौ के नोट बंद होने से कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया है।