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बिना आदेश पट्टेदार किसानों को बना दिया 2345 बीघा का मालिक

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गुन्नौर तहसील क्षेत्र के गांव बंद मीरमपुर में सिंचाई विभाग की डूब क्षेत्र में आसामी पट्टे पर आवंटित 2345 बीघा भूमि पर तहसील कर्मचारियों ने बड़ा खेल कर दिया। वर्ष 2012 में बिना किसी आदेश के ऑनलाइन खतौनी फीड करते समय नाम पर भूमि की श्रेणी 10(ग)एनजेडए (नॉन जमींदारी एबोलिशन) से बदलकर श्रेेणी 1(क) जेडए (जमींदारी एबोलिशन) में कर दिया और किसानों को उसका मालिक बना दिया। तहसीलदार गुन्नौर देवेंद्र मणि त्रिपाठी की जांच में पूरा मामला पकड़ में आया है। तहसीलदार की संस्तुति पर एसडीएम गुन्नौर ने मामले में जांच टीम गठित कर दी है। कितनों किसानों के नाम भूमि दर्ज है मामले की जांच चल रही है।
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संभल जिले की तहसील गुन्नौर के गांव बंद मीरमपुर में 145 हेक्टेअर (2345 बीघा) सरकारी भूमि है। गुन्नौर तहसीलदार देवेंद्र मणि त्रिपाठी ने एसडीएम गुन्नौर को भेजे पत्र में बताया कि बंद मीरमपुर ग्राम की खतौनी फसल वर्ष 1407-1412 ग्राम क्रमांक 127200 कंप्यूटराइज्ड की गई। जांच में पाया गया कि वर्ष 1975 में इस भूमि का मालिकाना हक सरकार कैसर हिंद की श्रेणी 10 (ग) एनजेडए सिंचाई विभाग के नाम पर दर्ज है। गंगा के डूब क्षेत्र में होने के कारण सिंचाई विभाग की ओर से इसे किसानों को फसल उगाने के लिए आसामी पट्टे पर आवंटित कर दिया गया था। जांच में पाया गया कि वर्ष 2012 में खतौनी कंप्यूटराइज्ड होने का काम शुरू हुआ था। कर्मचारियों ने गांव बंद मीरमपुर में सिंचाई विभाग की आसामी पट्टे पर आवंटित भूमि की खतौनी भी कंप्यूटराइज्ड कर दी। जो नियम विरुद्ध है। इस श्रेणी की भूमि की श्रेेणी नहीं बदली जा सकती। खतौनी कंप्यूटराइज्ड करने के साथ ही भूमि की श्रेणी 10 (ग) से बदलकर 1(क) एनजेडए (जमींदारी एबोलिएशन) में दर्ज कर दी गई। श्रेणी बदलते ही भूमि का मालिकाना हक भी बदल गया। अब इस भूमि के मालिकाना हक के रूप में किसान दर्ज हैं। तहसीलदार के पत्र पर एसडीएम ने तहसीलदार, सिंचाई विभाग, राजस्व कर्मचारियों के साथ जांच के लिए टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
भूमि की श्रेणी बदलने का तहसील में नहीं मिल कोई रिकॉर्ड
तहसीलदार ने एसडीएम को भेजे पत्र में बताया कि इस भूमि को बिना किसी आदेश के ही कंप्यूटर खतौनी फीड करते समय श्रेणी 1(क) में दर्ज किया गया है। नियमानुसार सही नहीं है। राजस्व निरीक्षक कार्यालय में काफी तलाश कराने पर ऐसा कोई प्रपत्र या दस्तावेज नहीं मिला जिसके आधार पर सिंचाई विभाग की भूमि की श्रेणी बदलकर खाते में दर्ज की जा सके।
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पांच अन्य गांव भी डूब क्षेत्र में पर कंप्यूटराइज्ड खतौनी नहीं हुई फीड
तहसीलदार देवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि गुन्नौर तहसील क्षेत्र में श्रेणी 10 (ग) की भूमि बंद मीरमपुर के अतिरिक्त बंद फरीदपुर, बंद गंगावास, बंद बिचपुडी, बंद सदरपुर, बंद हुसैनपुर में भी शामिल हैं। डूब क्षेत्र के गांव को बंद के नाम से संबोधित किया गया है। वर्ष 2012 में खतौनी कंप्यूटराइज्ड करने के आदेश हुए थे। तब गांव मीरमपुर की श्रेणी 10(ग) की भूमि को नियम विरुद्ध कंप्यूटराइज्ड खतौनी फीड कर दिया गया जबकि अन्य पांच गांव की खतौनी को कंप्यूटराइज्ड फीड नहीं किया गया।
मालिकाना हक मिलने पर किसानों ने शुरू कर दी भूमि की खरीद फरोख्त
डूब क्षेत्र की गांव बंद मीरमपुर की सिंचाई विभाग की भूमि की श्रेणी बदलने पर किसानों को मालिकाना हक मिल गया। किसानों ने इस भूमि की खरीद फरोख्त शुरू कर दी। तहसील प्रशासन जांच कर रहा है कि कितने किसानों ने अब तक भूमि बेची है।
तहसीलदार गुन्नौर ने बंद मीरमपुर में एनजेडए की भूमि की श्रेणी को बदलकर गड़बड़ी करने का मामला पकड़ा है। मामले की जांच के लिए तहसीलदार, सिंचाई विभाग के साथ टीम गठित की गई। जांच में जो भी दोषी मिलेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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रामकेश धामा, एसडीएम गुन्नौर
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