चंदौसी (संभल)। मेला गणेश चौथ परिसर में सोमवार को प्रमुख आयोजन नरांतक वध का मंचन देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। भगवान गणेश के स्वरूप में सजे कलाकार ने नरांतक के पुतले पर बाण चलाकर उसका वध किया। भगवान श्री गणेश के जयकारों से माहौल गूंज उठा।
गणेश प्रतिमा विसर्जन की पूर्व संध्या पर भगवान श्री गणेश ने नरांतक वध किया। भगवान श्री गणेश का स्वरूप और श्रद्धालु श्री गणेश मंदिर से शोभायात्रा के रूप में ढोल नगाड़े व गाजे-बाजे के साथ मेला परिसर पहुंचे। दुकानदारों ने जगह जगह भगवान गणेश के रथ का स्वागत किया। हरे रामा हरे कृष्णा के भजन कीर्तन के साथ मेला ग्राउंड में स्थित नरातंक के पुतले का गणेश जी ने तीर चलाकर वध किया। नरांतक का पुतला आतिशबाजी के साथ धू-धूकर जल उठा। नरांतक का वध होते ही भगवान गणेश के जयकारे श्रद्धालु लगाने लगे। पूरा मेला ग्राउंड गणेश मय हो गया। रथ के साथ चल रहे श्रद्धालुओं का दुकानदारों ने पटका पहनाकर स्वागत किया।
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नरांतक को ब्रह्मा से मिला था अपार बल का वरदान
कथावाचक पंडित भूदेव शंखधार ने बताया कि रुद्रदेव ब्राह्मण हुआ करते थे। उनकी पत्नी शारदा थी। जिनके दो पुत्र हुए नरांतक बड़ा पुत्र और छोटा पुत्र देवांतक था। नरांतक ने ब्रह्मा की तपस्या की और उनसे अपार बल शक्ति का वरदान प्राप्त किया। तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया। नरांतक की प्रवृत्ति राक्षसी प्रवृत्ति थी। जिसके कारण वह सभी देवी देवताओं को परेशान किया करता था। जिससे गणेश जी ने देवी देवताओं को छुटकारा दिलाने के लिए नरांतक का वध किया था।
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हीरा लाल 19 साल से गणेश रूप में कर रहे नरांतक का वध
हलवाई हीरालाल ने बताया कि वह पिछले 19 साल से भगवान गणेश का स्वरूप करते चले आ रहे हैं। गणेश के स्वरूप में वह नरातंक का वध करते हैं। मेला गणेश चौथ में नरांतक का मंचन पिछले 31 साल से हाे रहा है। इससे पहले गणेश के स्वरूप में उनके पिता ज्योति लाल नरांतक वध का मंचन करते थे।