मुद्रा अथवा सिक्के किसी भी ऐतिहासिक कालखंड के जीते-जागते दस्तावेज हैं। सिक्कों से तत्कालीन शासकों की आर्थिक स्थिति, जनता के प्रति उनका नजरिया का साफ-साफ पता लगता है। सिक्के की धातु, टकसाल द्वारा इस्तेमाल की गई कलाकृति और चिह्न, उस पर उत्कीर्ण संदेश अथवा वाक्य इतिहास को बांचने में मदद करते हैं। संभल के दीपासराय स्थित मदरसा इस्लामिया आजाद मुनव्वर उल-कुरान में बुधवार को मुद्रा दिवस पर सिक्कों की प्रदर्शनी लगाई गई। इसे विद्यार्थियों ने खुब पसंद किया। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नरेश यादव ने मुख्य अतिथि की हैसियत से प्रदर्शनी का शुभारंभ किया।
मदरसा प्रबंधक मोहम्मद अब्दुल्ला अरीब रजा ने बच्चों को सिक्कों के बारे में जानकारी दी। मोहम्मद अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें मुद्रा इकट्ठा करने का शौक बचपन से ही था। जो आगे बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि प्राचीन काल के सिक्कों को देख कर भारतीय मुद्रा और उसके इतिहास की जानकारी हासिल की जा सकती है। मोहम्मद अब्दुल्ला ने अपने मदरसे में सिक्कों का म्यूजियम कायम कर एक अच्छा काम किया है।
अरीब रजा, जैनब परवीन, आस मोहम्मद मुत्तलिब महमूद, उजमा नूर, फरहा नाज, मोहम्मद हाशिम, मोहम्मद कादिर, मोहम्मद शहजाद व मदरसे के छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सभासद मोहम्मद उस्मान व अन्य लोगों ने प्रदर्शनी की सराहना की। इस मौके पर तांबे के सिक्कों का चलन फिर से शुरू कराने की मांग की गई।