संभल। 24 नवंबर को शहर में हुए बवाल के जख्मों को भूलकर लोग आगे बढ़ रहे हैं। सोमवार को साप्ताहिक बंदी के बाद भी बाजार में काफी चहल-पहल रही। बाजारों में ग्रामीण क्षेत्र से भी लोग खरीदारी करने के लिए पहुंचे। जिससे जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है।
24 नवंबर की सुबह साढ़े आठ बजे जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान बवाल शुरू हुआ था। भीड़ ने पुलिस पर पथराव और फायरिंग की थी। पुलिस ने भी लाठीचार्ज कर उपद्रव कर रही भीड़ को खदेड़ा था। यह बवाल बाजार खुलने से पहले ही शुरू हो गया था। इसके बाद शनिवार तक इसका असर दिखाई दिया। रविवार को कुछ दुकानों को छोड़कर बाजार खुला था। सोमवार को साप्ताहिक बंदी के बाद भी बाजार में सभी दुकानें खुल गईं और ग्राहक भी बाजार में काफी दिखाई दिए। जो देहाज क्षेत्र का ग्राहक शहर के बाजार जाने से भयभीत था वह अब भयमुक्त हो गया है।
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बवाल के बाद पहली बार खुलीं जामा मस्जिद के आसपास की दुकानें
सोमवार को जामा मस्जिद के आसपास की सभी दुकानें खुली हुई दिखाई दीं। लोगों की चहल पहल भी काफी नजर आई। करीब आठ दिन तक इस इलाके में बवाल का असर दिखाई दिया। क्योंकि 24 नवंबर की सुबह जामा मस्जिद से ही बवाल शुरू हुआ था। इस बवाल के दौरान ही कार और बाइकाें को उपद्रवियों ने फूंक दिया था। ज्यादातर लोग घर छोड़कर भाग गए थे। और जिन लोगों की दुकानें जामा मस्जिद के नजदीक थीं वह दुकान खोलने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे थे। अब पुलिस प्रशासन के प्रयास से लोगों ने अपनी दुकानों को खोलकर कारोबार को शुरू किया है।
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शहर में चौकसी रहेगी बरकरार, प्रमुख स्थान व चौराहों पर फोर्स तैनात
शहर में बवाल के बाद तनाव शांत हो गया है। इसके बाद भी पुलिस- प्रशासन सतर्कता बरत रहा है। शहर अभी भी छावनी में तब्दील है। प्रमुख स्थानों और जामा मस्जिद के पास सबसे ज्यादा फोर्स को तैनात है। पीएसी की नौ कंपनी को लगाया है। इसके अलावा एक कंपनी आरएएफ की मुस्तैदी है। इसी तरह रेंज के सभी जिलों के थानों से भी फोर्स संभल बुलाई हुई है। इसमें सभी की मुस्तैदी प्रमुख स्थानों पर दिख रही है। एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई का कहना है कि फोर्स एहतियाती तौर पर लगाया हुआ है। जहां बवाल हुआ है उन इलाके में ड्यूटी लगी है। इसके अलावा जामा मस्जिद के आसपास फोर्स को लगाया है। रात के समय निगरानी के लिए अलग से अधिकारियों की ड्यूटी है।