चंदौसी की लेदर इंडस्ट्री सही मुकाम के लिए जद्दोजहद कर रही है, मगर उसे अपने ही जनप्रतिनिधियों का साथ नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन लेदर इंडस्ट्री तमाम संकटों से जूझ रही है, अगर उसे मदद मिले तो बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।
प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद समेत जिले की चारों विधान सभा सीटों पर सपा के ही विधायक हैं, मगर इंडस्ट्री के लिए कोई पहल करते दिखाई नहीं देते। कारोबारियों का कहना है कि, अगर यहां टेस्टिंग लैब और रॉ-मैटेरियल डिपो बने तो कारोबार को पंख लग सकते हैं।
चंदौसी में लेदर सामग्री बनाने के लिए फिलहाल 1700 सूक्ष्म इकाई हैं। इनमें से करीब दो सौ लघु इंडस्ट्री के तहत पंजीकृत हैं। करीब दो सौ लघु इंडस्ट्री पंजीकृत हैं। इन सबमें करीब दो हजार कारीगर और साढ़े तीन हजार मजदूर रोजी-रोटी कमा रहे हैं।
फिलहाल इन इकाइयों का करीब 10 करोड़ रुपये प्रतिमाह का टर्नओवर है। इधर, इन इकाइयों के लगने से विकसित हो रहा चंदौसी नगर का मोहल्ला चुन्नी जिम्मेदारों की उपेक्षा से मायूस है। सूक्ष्म एवं लघु उद्योग अब भी संसाधनों की बाट जोह रहा है।
नहीं बन सका क्लस्टर
दो साल पहले क्लस्टर तैयार करने की कवायद शुरू हुई थी, मगर प्रक्रिया जटिल होने के कारण अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है। समय के साथ कारोबार में बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए कारोबारियों को बेहतर प्रशिक्षण, डिजाइन और टेस्टिंग लैब की जरूरत है।
स्थानीय स्तर पर यदि लैदर इंडस्ट्री को विकसित करने के लिए प्रयास किए जाएं तो रोजगार सृजन के साथ-साथ बेहतर कारोबार की उम्मीद बढ़ जाएगी, मगर जिम्मेदार इसकी पैरवी करते नजर नहीं आ रहे।
कच्चे माल का डिपो बने तो मिलेगी राहत
चंदौसी। कारोबारी कच्चा माल लाने के लिए पूरी तरह आगरा और दिल्ली पर निर्भर हैं। आगरा में लेदर इंडस्ट्री के लिए कच्चे माल का डिपो बना हुआ है। कारोबारी आगरा से कच्चा माल खरीद कर चंदौसी लाते हैं। माल लाने में धनराशि और समय का दुरुपयोग होता है।
उत्पादन में लागत बढ़ने से थोक माल की कीमत में बढ़ोतरी और मुनाफे में कमी होती है। जिससे कारोबारी को नुकसान हो जाता है। स्थानीय कारोबारियों की मांग है कि चंदौसी में कच्चे माल का डिपो खोला जाए।
टेस्टिंग लैब और डिजायनर सेंटर की है दरकार
चंदौसी। प्रोडक्ट की गुणवत्ता परखने के लिए टेस्टिंग लैब के बिना कारोबारी अपने माल की बिक्री करते समय सटीक दावा नहीं कर पाते हैं। क्वालिटी चेक के बाद माल की सही कीमत और क्रेता को समझाने में आसानी होती है। इसी तरह समय के साथ बाजार में नए नए डिजाइन आ रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों को दिल्ली जाकर डिजाइन बनवाने पड़ते हैं। इससे एक दिन का समय और धनराशि दोनों का ही दुरुपयोग होता है।
कारोबार में परेेशानी हो रही है। जिम्मेदारों को कारोबार के सापेक्ष माहौल बनाना चाहिए। मसलन करोबारियों, कारीगरों और श्रमिकों को प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। -अविनाश सिंह, कारोबारी।
लेदर इंडस्ट्री को सफलता के मुकाम पर पहुंचाने के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था किया जाना आवश्यक है। सबसे अधिक महत्वपूर्ण कच्चे माल का डिपो है। इस ओर सरकार को प्राथमिकता के आधार पर पहल करनी चाहिए।-प्रेमपाल, कारोबारी।
बाजार में प्रतिस्पर्धा का दौर है। एक से बढ़कर एक डिजाइनर उत्पाद बाजार में आ रहे हैं। ऐसे में चंदौसी में लेदर इंडस्ट्री के लिए डिजाइनिंग सेंटर स्थापित किया जाना बेहद जरूरी है, तभी कारोबार को रफ्तार मिल सकेगी। -ओमप्रकाश, कारोबारी।
क्वालिटी चेक और प्रशिक्षण का इंतजाम किए जाना जरूरी है। इससे उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ेगी। बाजार में स्पर्धा के माहौल में दमदारी से मुकाबला किया जा सकेगा। -मीना देवी, कारोबारी।