जिम्मेदारों के पास खूंखार कुत्तों, बंदरों और सियार के हमले से बचाव के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है। क्षेत्रवासियों में रोष है।
संयुक्त चिकित्सालय में रोजना रैबीज के इंजेक्शन लगवाने के लिए लंबी कतारों का नजारा दिख रहा है। हाल यह है कि प्रतिदिन 70 से 135 मरीज रैबीज लगवाने आते हैं। महीने में औसतन तकरीबन 2100 मरीजों के रैबीज का इंजेक्शन लगाया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में खुंखार कुत्तों का कहर जारी है।
गांव में भी कुत्तों और अन्य पशुओं ने परेशानी पैदा की है। कालोनियों में बंदरों से लोग परेशान हैं। आए दिन किसी ने किसी को घायल कर रहे हैं। पालिका के पास आवारा कुत्तों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। पालिका प्रशासन का कहना है कि न तो उन्होंने कभी इसकी गणना कराई है और न ही कुत्ते पकड़ने के लिए कोई सरकारी फंड दिया जाता है। ऐसे में उन पर रोक की व्यवस्था पशुपालन विभाग या वन विभाग की होनी चाहिए।
वन विभाग पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। पशुपालन विभाग के पास भी आवारा कुत्तों की संख्या नहीं है। जिम्मेदार विभाग समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। लेकिन आवारा खूंखार कुत्ते लगातार लोगों के लिए समस्या बनते जा रहे हैं। इस माह अब तक करीब 2100 मरीजों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं।