कल्कि महोत्सव-2019 की तीसरी सांस्कृतिक में धर्म मंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में देश की एकता व अखंडता के रंग बिखरे। कवियों और शायरों ने देश की कई ज्वलंत समस्याओं पर भावनात्मक काव्य प्रहार किया तो शायरों ने अपने अंदाज में अमन और शांति का संदेश दुनियां को दिया।अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा की शमां कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, स्वामी विक्रम विनोदम, स्वामी कल्याण देव, अतुल कृष्ण रामायणी, मिर्ची बाबा, माजिद देवबंदी आदि ने रोशन की। इसके बाद शायरा मुमताज नसीम ने सरस्वती वंदना की।
अध्यक्षता करते हुए शायर माजिद देवबंदी ने नात पढ़ी। इसके बाद निजामत करते हुए नदीम फर्रुक ने संभाली। इंटरनेशनल सूफी मिशन दिल्ली के चेयरमैन शायर डा.माजिद देवबंदी बोले-खुद को भी आजमाओ तो पहले, कुछ नया कर दिखाओ तो पहले। मंदिर व मस्जिद दिल से दिल को मिलाओ तो पहले। मथुरा से आई कवियत्री पूनम वर्मा अपने दिल की बात कुछ यूं कही-किसी की याद की खुश्बू में भीगे केश लाई हूं, दिलों को जोड़ने वाला अमिट उपदेश लाई हूं।
अलीगढ़ से आई शायरा मु मताज नसीम ने प्यार का इजहार किया-आज इजहार कर लिया हमने, खुद को बेकरार कर लिया हमने, अब लगता है जान जाएगी, तुमसे जो प्यार कर लिया हमने। महाराष्ट्र से आए अमन अक्षत बोले-जग की सब पहेलियों का देखें कैसा हल हए, लोगों के जो प्रश्न थे वह शौक में बदल गए। कवि नरेंद्र अटल बोले-सदा वो परवरिश करके हमें रहना सिखाती है, जमीं मां है हमारी गर्व से चलना सिखाती है।
संचालक नदीम फर्रुक ने हिदायत दी कि-नाम पर महजबों पे लड़ मरकर, खूं को यूं ही अगर वहां दोगे। जब सरहदों को जरूरत पड़ेगी तो सरहदों को क्या देंगे। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी काव्य पाठ किया। शेर भी पढ़े।
इसके अलावा हाशिम फिरोजाबादी, कुंवर जावेद, जाकिर तन्हा, जमील असगर, सबा बलरामपुरी, पूनम वर्मा, नरेंद्र अटल, गीतकार अमन अक्षत, उरूज हाशमी आदि कई कवियों और शायरों ने मध्यरात्रि के बाद तक महफिल को आबाद रखा। जबरदस्त भीड़ भी लगातार तालियां बजाकर कवियों और शायरों का उत्साह बढ़ाती रही।इस मौके पर राकेश पाठक, राजेश यादव, अवधेश वार्ष्णेय, अरुण त्यागी, प्रमोद सक्सेना, दीपक वार्ष्णेय आदि कई गणमान्य लोग व साधु संत मौजूद रहे।