मुरादाबाद। महिला अस्पताल में कम वजन के नवजातों के इलाज का तरीका बदल रहा है। 2.5 किलो से कम वजन वाले लेकिन सांस लेने में परेशानी न होने और वाइटल सामान्य रहने वाले बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती करने के बजाय कंगारू मदर केयर (केएमसी) दिया जा रहा है। इसमें बच्चे को कंगारू की तरह मां के सीने से त्वचा के सीधे संपर्क में रखा जाता है। इससे शरीर का तापमान सामान्य रखने और स्तनपान को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।
महिला अस्पताल के अनुसार हर माह जन्म लेने वाले करीब 25 प्रतिशत नवजात कम वजन के होते हैं। इनमें सभी बच्चों को एसएनसीयू की जरूरत नहीं होती। सांस लेने में दिक्कत, ऑक्सीजन की कमी या दूसरी गंभीर समस्या वाले बच्चों को ही विशेष नवजात देखभाल इकाई में रखा जाता है। बाकी बच्चों की स्थिति के अनुसार केएमसी से निगरानी और देखभाल की जा रही है। अस्पताल में रोजाना सात से आठ महिलाएं बच्चों को कंगारू मदर केयर दिलाने के लिए पहुंच रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि केएमसी में मां के शरीर की गर्माहट बच्चे के तापमान को बनाए रखने में मदद करती है और बच्चा मां के करीब रहने से बार-बार स्तनपान कर सकता है।
मां का दूध नहीं तो मिल्क बैंक से पोषण
केएमसी की व्यवस्था को महिला अस्पताल के मदर मिल्क बैंक से भी जोड़ा गया है। अस्पताल में 15 मई 2025 को शुरू हुए मिल्क बैंक में अब तक 252 माताओं ने दूध दान किया है और 369 नवजातों को इसका लाभ मिला है। दूध दान करने वाली माताओं की पहले जांच और काउंसलिंग होती है। इसके बाद ब्रेस्ट पंप से दूध लेकर डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इसे डीप फ्रीजर में तीन महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सीएमएस डॉ. कर्मवीर सिंह का कहना है कि कम वजन के बच्चों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के अलावा बुखार, पीलिया और निमोनिया का खतरा रहता है। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में फेफड़ों के पूरी तरह विकसित न होने से सांस संबंधी परेशानी भी हो सकती है। ऐसे में गंभीर बच्चों के लिए एसएनसीयू जरूरी है, जबकि स्थिर बच्चों के लिए केएमसी अस्पताल में कम खर्च और मां-बच्चे के सीधे संपर्क वाली देखभाल का विकल्प बन रही है।