संभल। दो सिपहियों की हत्या के बाद आतंक का पर्याय बने अपराधी कमल को अमरोहा जिले की पुलिस ने 75 घंटे के भीतर मार गिराया। कमल पुत्र भीकम बहजोई थाना क्षेत्र के गांव रंपुरा का मूल निवासी था और अक्टूबर 2014 में कुंदरकी के काजीपुर गांव निवासी इंजीनियर इकराम की हत्या में पकड़े जाने के बाद अपराध की दुनिया में चर्चित हुआ था। कमल तभी से मुरादाबाद के जिला कारागर में कैद था और 17 जुलाई को चंदौसी स्थित अदालत में पेशी के लिए पुलिस की अभिरक्षा में लाया गया था। पेशी से लौटते समय 17 जुलाई को ही शाम सवा पांच बजे के करीब चंदौसी-मुरादाबाद मार्ग पर पुलिस वैन में कमल, धर्मपाल और शकील ने दो सिपाहियों की आंख में मिर्च झोंकी तथा पिस्टल और तमंचे से गोली चलाकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद वैन का दरवाजा खींच कर तिरछा किया फिर तीनों अपराधी भाग गए थे। पुलिस की राइफल भी लूट ले गए थे।
यह इतनी बड़ी वारदात थी कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे थे। यूपी के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारियों, एसटीएफ और जिला पुलिस को वारदात के खुलासे के लिए लगाया गया। जिला स्तर पर दस टीमें बनीं। एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश, मुरादाबाद के आईजी रमित शर्मा ने संभल में डेरा डाल दिया और एडीजी अविनाश चंद्र भी पल-पल की खबर ले रहे थे। पुलिस की टीमों ने इस तरह से घेराबंदी की कि बदमाश हाथ आ जाए। यही वजह रही कि बदमाशों ने वारदात को अंजाम देने के 75 घंटे में ही अमरोहा जिले में संभल जनपद की सीमा से लगे शेरगढ़ के जंगलों में घेर लिया गया। अमरोहा पुलिस ने घेराबंदी तो शाम छह सात बजे से ही शुरू कर दी थी। लेकिन पुलिस को सफलता करीब आठ से साढ़े आठ बजे के बीच मिली। एक बदमाश को गोली लगी और पुलिस ने उसे तत्काल अमरोहा के जिला अस्पातल भेजा जहां पर रात 13.30 बजे चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसी बदमाश के कमल होने की बात सामने आई है। अब तक जो सूचनाएं मिली हैं, पुलिस की मुठभेड़ जारी है और दो बदमाशों को पुलिस घेरे हुए है। कमल, शकील और धर्मपाल पर ढाई-ढाई लाख रुपये का ईनाम था। पुलिस इन्हें तलाशने के आसपास के जनपदों के साथ दूसरे प्रांतों में भी दौड़ रही थी।