कल्कि धाम में मंदिर के शिलान्यास पर उठे विरोध को कल्कि पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णम ने सियासी ड्रामा बताया है। कहा कि कल्कि धाम तो वर्षों से स्थापित है। पिछले 15 साल से यहां कल्कि महोत्सव मनाया जा रहा है। कल्कि धाम के अंदर निर्माण का विरोध करना गलत है। कोई नई परंपरा नहीं डाली जा रही है। उन्हाेंने कहा कि चुनाव आने के कारण बर्क अपने लिए जमीन तलाश रहे हैं। इसीलिए कल्किधाम का विरोध हो रहा है।
कल्कि धाम में मंदिर के शिलान्यास पर पूर्व सांसद शफीकुर्रहरमान बर्क के विरोध को पूरी तरह से सियासी बताया। उन्होंने कहा कि कल्कि धाम में अभी बना हुआ धाम नहीं है। यहां वर्षों से पूजा पाठ हो रही है, 15 वर्षों से कल्कि महोत्सव होता आ रहा है। जिसमें केंद्र सरकार के मंत्री, कई राज्याें के मुख्यमंत्री आते हैं।
कल्कि हिंदू मुस्लिम-एकता का प्रतीक है। कल्कि धाम के अंदर मंदिर निर्माण का विरोध सियासी है। विरोध का कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और उन्हें अपने लिए सियासी जमीन और मुद्दा तलाशना है। अब वे पार्टी बदलना चाह रहे हैं। हम हिंदु मुस्लिम एकता के पक्षधर हैं। कल्कि धाम में नई परंपरा जैसा कुछ भी नहीं है। हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे किसी को ठेस पहुंचे। मुरादाबाद में सर्व धर्म एकता का सम्मेलन होने जा रहा है। वहां भी इस मुद्दे को रखा जाएगा और समाधान निकालने का प्रयास होगा।
उधर संभल में श्री कल्कि धाम के शिलान्यास पर सियासी माहौल बन गया है। कांग्रेस की जिलाध्यक्ष विमलेश कुमारी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने विरोध और समर्थन में बयान देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान से बातचीत के बाद वह अपना स्टैंड क्लीयर करेंगी। जबकि कांग्रेस के जिला महासचिव इतरत हुसैन बाबर ने कहा कि वह आचार्य प्रमोद कृष्णम के कल्कि महोत्सव में दस वर्ष से शामिल हो रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा नेता व जिला पंचायत सदस्य हरेंद्र सिंह खुलकर कल्कि मंदिर के पक्ष में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि संभल की धरती का महत्व आयोध्या व मथुरा से कम नहीं है।
हम किसी से डरने वाले नहीं ः बर्क
कल्कि महोत्सव में बड़ी हस्तियों के आने से हमारे ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता। क्या बड़ी हस्तियां देश का कानून बदल देंगी। या हमारे ऊपर दबाव बना देंगी। कोई कुछ भी कहे हम अपनी कौम के हक की लड़ाई लड़ेंगे। हम डर कर बैठने वाले लोगों में से नहीं हैं। हमें देश के कानून और संविधान पर भरोसा है। संविधान में सभी को अपने धार्मिक तौर तरीकों के हिसाब से रहने की पूरी आजादी है लेकिन मुसलमानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
मस्जिद में एक ईंट लगाने को नई परंपरा और नया निर्माण रोका जाता है। जबकि बिना अनुमति के कल्कि धाम का शिलान्यास किया जा रहा है? ऐसा क्यों क्या मुल्क में मुसलमानों के लिए अलग कानून है। प्रशासन हमें कमजोर न समझे। हम डर कर बैठने वालों में से नहीं हैं। यदि मुसलमानों के साथ भेदभाव किया गया तो हम आपसी विचार विमर्श करके निर्णय लेंगे।
डा. शफीकुर्रहमान बर्क, पूर्व सांसद।
‘कल्कि धाम निर्माण से खराब हो सकती फिजा’
संभल/बहजोई। एंचोड़ा कंबोह में श्री कल्कि धाम बनाए जाने से उलमाओं को फिजा खराब होने का अंदेशा दिखाई पड़ रहा है। उलमाओं ने शनिवार को बहजोई में जिलाधिकारी भूपेंद्र एस. चौधरी से मुलाकात की। उलमाओं ने मीडिया से कहा कि ऐसा लगता है कि श्री कल्कि धाम बनवाने में क्षेत्रीय पुलिस भी शामिल है। इसीलिए मंदिर निर्माण का जोर-शोर से प्रचार चल रहा है। कहीं कोई पाबंदी नहीं लगाई जा रही है।
जबकि मुसलमानों का कोई छोटा सा भी आयोजन होता है तो उसे नई परंपरा बताकर रोका जा रहा है। उलमाओं ने कहा कि नई परंपरा कायम करके मंदिर बनाए जाने और महोत्सव का आयोजन किए जाने से मुसलमान आशंकित हैं। प्रशासन इस पर ध्यान दे। ज्ञापन देने वालों में इमामे ईदगाह संभल मौलाना सुलेमान अशरफ हामिदी, काइदे एहले सुन्नत वल जमात मौलाना नफीस अख्तर, मौलाना अहसान, हाफिज जाकिर हुसैन रहे।
शिलान्यास ही नहीं, कल्कि महोत्सव पर भी लगाएं रोक
श्री कल्कि धाम का विरोध मुखर हो गया है। उलेमाओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। अब श्री कल्किधाम का शिलान्यास ही नहीं महोत्सव पर भी सवाल खड़े करते हुए उसके आयोजन को रोकने की मांग की गई है। टकराव के अंदेशे में प्रशासन सतर्क है। खुफिया तंत्र पल-पल की खबर शासन को भेज रहा है।
एंचोड़ा कंबोह में 7 नवंबर को श्री कल्कि धाम का शिलान्यास होना है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के साथ साथ धार्मिक क्षेत्र की कई हस्तियां शिलान्यास समारोह में शिरकत कर रही हैं। समारोह के लिए बड़े जोर-शोर के साथ तैयारी चल रही है। दो हजार से अधिक लोगों के बैठने का पांडाल बनाया जा चुका है।
हेलीपैड बन रहा है। मंडल भर के जनपदों से पुलिस बल लगाया गया है ताकि वीआईपी की सुरक्षा और कार्यक्रम में कोई व्यवधान न हो। लेकिन शुक्रवार को पूर्व सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क और शनिवार को संभल के चुनिंदा उलमाओं ने कल्किधाम बनाए जाने और कल्कि महोत्सव का विरोध किया है। जिलाधिकारी से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा है। इसमें श्री कल्कि धाम के निर्माण और महोत्सव एक नई परंपरा बताया गया है। उलमाओं की नजर में इससे सांप्रदायिक सौहार्द को खतरा है।
शिलान्यास समारोह को तत्काल न रोका जाए तो इसकी प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। वहीं दूसरी ओर चुनिंदा मुसलमानों ने एडीएम और एसडीएम से मिलकर कल्कि धाम बनाए जाने की मांग के साथ ज्ञापन सौंपा है। विरोध और समर्थन की खबरों के बीच प्रशासन सतर्कता बनाए हुए है। मंडलायुक्त और डीएम ने शनिवार को दोपहर एंचोड़ा कंबोह का दौरा किया। आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। मौके पर मौजूद अधिकारियों को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क दृष्टि बनाए रखने निर्देश दिए हैं। राज्य का खुफिया तंत्र भी सतर्क है।