चंदौसी। गीता सत्संग भवन में सोमवार को विधि विधान के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कथा से पूर्व श्रद्धालुओं ने ढोल नगाड़ों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली। पीले वस्त्र धारण की हुई महिलाएं अपने सिर पर कलश रखकर शामिल हुईं। गीता सत्संग भवन से शुरू हुई कलश यात्रा आसपास के बाजारों से गुजरती हुई पुन: कथा स्थल पर पहुंचकर संपन्न हुई।
कथा के पहले दिन कथाव्यास प्रशांत कुमार मिश्र ने श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा का श्रवण अनेक जन्मों के संचित पुण्यों के उदय से ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण का वाङ्मय स्वरूप है, जिसके श्रवण से मनुष्य के दैहिक, दैविक और भौतिक कष्ट दूर होते हैं तथा उसके जीवन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार होता है।
उन्होंने धुंधकारी और गोकर्ण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि कलियुग में मनुष्य सांसारिक मोह में पड़कर अपने स्वधर्म और कर्तव्यों से दूर होता जा रहा है। भागवत कथा व्यक्ति को आत्मचिंतन का मार्ग दिखाकर उसे धर्म और सदाचार की ओर प्रेरित करती है। कथा के बीच-बीच में भजनों की भी प्रस्तुति दी गई। जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कार्यक्रम के समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर आयोजक आचार्य सत्य प्रकाश पाठक, दिवाकर पाठक, अनुपम शर्मा, मनोज कुमार, सत्यवीर सिंह, सुधांशु उपाध्याय, हर्ष शर्मा, रविंद्र शर्मा, नीरज शर्मा, जगदेव शर्मा, नेत्रपाल सिंह, देवकी नंदन आदि मौजूद रहे।