संभल। जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित आयोग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। तीन सदस्यीय आयोग के दो सदस्य रविवार को संभल पहुंचे और हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा अफसरों से जानकारी ली। आयोग की टीम जामा मस्जिद भी गई और वहां मस्जिद कमेटी के सदस्यों से मुलाकात की। इस बीच कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि हिंसा के जिम्मेदारों के खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं। अब तक 400 लोगों की पहचान हो चुकी है।
आयोग के अध्यक्ष हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा और सदस्य पूर्व डीजीपी एके जैन संभल पहुंचे। जबकि सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव अमित मोहन नहीं पहुंचे। टीम सबसे पहले जामा मस्जिद के उस इलाके में पहुंची, जहां 24 नवंबर को बवाल हुआ था। मस्जिद के आसपास घटनास्थल का मुआयना किया। जहां पुलिस और भीड़ में झड़प हुई थी। एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बवाल की जानकारी बिंदुवार दी। इसके बाद नखासा तिराहा और हिंदूपुरा खेड़ा इलाकों का दौरा किया। अधिकारियों ने आयोग की टीम को भीड़ के एकत्र होने और बवाल के बाद लौटने वाले रास्ते दिखाए। बाद में टीम लोकनिर्माण विभाग के गेस्ट हाउस पहुंची और अधिकारियों से बातचीत करने के बाद रवाना हो गई।
कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि न्यायिक जांच आयोग की टीम ने अभी घटनास्थल का मौका मुआयना किया है। टीम दोबारा आएगी और बयान दर्ज करने के साथ अन्य कार्रवाई पूरी करेगी। टीम ने जो सवाल पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से किए गए, उनका जवाब दिया है। मस्जिद कमेटी से भी टीम ने बात की है।
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टाइमलाइन
सुबह 10: 30 टीम संभल कोतवाली पहुंची।
सुबह 10: 40 बजे जामा मस्जिद के पीछे बवाल वाले स्थान को देखा।
सुबह 10: 55 बजे जामा मस्जिद में टीम दाखिल हुई।
सुबह 11 बजे टीम मस्जिद से बाहर निकल आई। कोतवाली के लिए चली गई
सुबह 11: 15 बजे नखासा तिराहा पहुंची, 10 मिनट घटनास्थल देखा।
सुबह 11: 30 बजे हिन्दूपुरा खेड़ा टीम पहुंची।
सुबह 11: 45 तक घटनास्थल की जानकारी ली।
सुबह 11: 55 बजे पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस टीम पहुंची।
दोपहर 12: 30 बजे एएसपी कार्यालय के लिए टीम रवाना हो गई।
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दो माह तक चलेगी जांच, घटना की तह तक पहुंचा जाएगा
आयोग के अध्यक्ष हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र अरोड़ा ने संभल से जाते हुए मीडियो से कहा कि यह जांच अभी दो महीने तक चलेगी। घटना की तह तक पहुंचा जाएगा। अभी आयोग की टीम ने घटना की प्राथमिक जानकारी हासिल की है और घटनास्थल का मुआयना किया है। जिससे स्थिति को समझा जा सके। अभी तो अधिकारी व आम लोगों के बयान दर्ज होने के साथ ही अन्य कार्रवाई को पूरा किया जाना बाकी है। इसके चलते ही दो महीने का समय लगेगा।