फसली सीजन में उत्तर प्रदेश की राइस मिलें रोजाना चार लाख क्विंटल के औसत उत्पादन के मुकाबले फिलहाल 10 फीसदी उत्पादन ही कर पा रही हैं। मिलर्स के पास कच्चे माल की आवक नहीं है तो बाजार में भी चावल की मांग में भारी कमी आई है।
उत्तर प्रदेश में कुल नौ हजार राइस मिलों में नोटबंदी के बाद संकट है। जिले की नौ बड़ी राईस मिलों में भी उत्पादन मात्र 10 फीसदी पर रह गया है। राइस मिलर्स कच्चे माल की आवक नहीं होने से नाउम्मीद हो रहे हैं। उत्पादन पूरी तरह से बंद है।
नकदी की कमी के चलते स्थानीय आढ़ती और व्यापारी धान की खरीद नहीं कर पाए। जिससे राइस मिलर्स को कच्चा माल यानि की धान की आवक नहीं हो सकी। इसके चलते उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो गया। बाजार स्टाक में रखे चावल से स्थानीय मांग को पूरा कर रहा है। लेकिन जिलेभर की नौ राइस मिलों में करीब तीन श्रमिक भी बेरोजगार हो गए हैं।
घट रहा है स्टाक, नहीं हो रहा उत्पादन
चंदौसी। नोटबंदी के बाद राइस मिलर्स के सामने संकट की स्थिति है। नोटबंदी के बाद से अब तक बफर स्टाक के सहारे चले। उत्पादन बंद होने के कारण स्टाक धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। स्टाक समाप्त होने के बाद चावल की खपत के सापेक्ष मांग में तेजी के कारण हालात मुश्किल भरे हो सकते हैं।
क्या कहना है इनका
किसानों ने नकदी नहीं मिलने के कारण धान का स्टाक कर लिया है। किसानों ने गेहूं की बुआई और अन्य जरुरतों को पूरा करने के लिए धान की फसल का कुछ हिस्सा बेचकर फौरी तौर पर काम चला लिया है। नंबर एक में कारोबार करने वालों को ताकत मिलेगी। फिलहाल दिक्कत तो हो ही रही हैं। - संदीप अक्षत, राइस मिलर्स।
प्रदेश की करीब नौ हजार बड़ी राइस मिलें 50 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद करती थीं। नोटबंदी के बाद यह खरीद केवल डेढ़ लाख मीट्रिक टन ही हो सकी है। कारोबार केवल 10 फीसदी रह गया है। स्टाक खत्म होने के कगार पर है। स्टाक खत्म होने के बाद 1900 सौ रुपये क्विंटल का चावल तीन हजार में भी मिलना मुश्किल हो जाएगा। - संजीव अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन।