संभल। पहले चरण की सफलता और निवेशकों की रुचि के बाद संभल जिले में औद्योगिक गलियारे का दायरा अब और बढ़ाया जाएगा। इसके लिए दूसरा चरण शुरू हुआ है। इस संबंध में प्रशासन ने 303 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की है। जिस पर यूपीडा के अधिकारियों ने भी मोहर लगा दी है।
बुधवार को बहजोई में इस संबंध में बैठक भी हुई, जिसमें इसे स्वीकृति मिली। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाला यह औद्योगिक गलियारा संभल के लिए केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य की खुशहाली का ग्रोथ इंजन साबित होगा। दरअसल, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) गंगा एक्सप्रेसवे किनारे खिरनी जंक्शन के पास औद्योगिक गलियारा विकसित कर रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना और हजारों रोजगार पैदा करना है। निवेशकों को यहां चौड़ी सड़कें, 24 घंटे बिजली और जल निकासी जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
एडीएम प्रदीप वर्मा ने बताया कि पहले चरण में 222.20 हेक्टेयर भूमि की खरीद हो चुकी है। अब दूसरे चरण में भूमि खरीदी जानी है। इसके लिए गांव अमावती कुतुबपुर में 53, सारंगपुर में 82, भमौरी पट्टी में 32, खरसफा में 63, सौंधन मोहम्मदपुर में 56 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। जबकि इन्हीं गांवों में 15 हेक्टेयर से अधिक सरकारी भूमि भी मिली है। कुल 303 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। यह पहले चरण से भी कहीं अधिक है। क्योंकि उस समय चार गांवों में 239 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई थी। यूपीडा के अधिकारी बीडी वर्मा ने इसे फाइनल किया है। अब इसकी खरीद शुरू होनी है।
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स्थानीय उद्योगों को भी मिलेगा वैश्विक मंच
यूपीडा के औद्योगिक गलियारे का मुख्य उद्देश्य स्थानीय हड्डी सींग, मेंथा आदि उद्योग को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है। बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं से उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। इससे स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। इस क्षेत्र में निवेश करने वाली इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन मिलेंगे।
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बड़ी कंपनियों के खुलेंगे कारखाने और वेयरहाउस
एडीएम ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर में बड़ी कंपनियों के कारखाने और वेयरहाउस खुलेंगे। इससे संभल और आसपास के जिलों के हजारों युवाओं को अपने ही शहर में नौकरी और स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। स्थानीय प्रतिभा को अब रोजगार के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। संभल हमेशा से ही हड्डी सींग, मेंथा आदि का बड़ा केंद्र रहा है। इस क्लस्टर के बनने से स्थानीय व्यापारियों को ग्लोबल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मिलेगा। माल को स्टोर करने, पैक करने और भेजने की लागत कम होगी, जिससे संभल का उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।
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दूसरे चरण में चिह्नित जमीन कमोवेश फाइनल ही है। हालांकि, सत्यापन के बाद इसकी खरीद के लिए मंजूरी मिलेगी। जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
बीडी वर्मा, भूमि अधिग्रहण अधिकारी, यूपीडा