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Sambhal News: संसाधनों के पंख लगे तो हौसलों को मिले उड़ान

Thu, 09 May 2024 02:41 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
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संभल। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने वाले क्रिकेटर मोहम्मद शमी, पीयूष चावला और बीते दिनों दुबई में 21वीं जूनियर एशियन चैंपियनशिप में शॉटपुट में स्वर्ण पदक विजेता अनुराग कलेर की तरह जिले में भी प्रतिभाएं हैं। लेकिन इन खेल प्रतिभाओं को संसाधनों के पंख नहीं लग पाए, जिससे उनके हौसले खेल के आसमान पर उड़ान नहीं भर पा रहे हैं।
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संभल के खिलाड़ियों को प्रतिभा निखारने के लिए संसाधनों की कमी से जूझना पड़ रहा है। इन संसाधनों में खेल के मैदान से लेकर कोच और शिक्षण संस्थानों की कमियां हैं। खेल प्रतियोगिताएं भी स्कूल स्तर तक सीमित होकर रह गई हैं। जिससे खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। हालांकि, बहजोई के गांव भरतरा में 4.318 हेक्टेयर भूमि पर 18 करोड़ रुपये की लागत से जिला स्टेडियम के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही शासन से पांच करोड़ रुपये की पहले किश्त भी जारी हो गई है। लेकिन विभागीय अधिकारियों के सुस्त रवैये के चलते अभी तक टेंडर प्रक्रिया नहीं हो सकी। जिसके कारण स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। अब आचार संहिता हटने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया हो सकेगी। उसके बाद ही स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा। यदि विभागीय अधिकारी सुस्त न होते तो अब तक स्टेडियम का निर्माण कार्य शुरू हो चुका होता।

खिलाड़ी बोले...
प्रतिभा निखारने के लिए संसाधन जरूरी
दुबई में आयोजित 21वीं जूनियर एशियन चैंपियनशिप में शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतने वाले संभल के गांव भवालपुर बांसली निवासी एथलीट अनुराग कलेर का कहना है कि जिले के खिलाड़ियों प्रतिभा की कमी नहीं है। लेकिन उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए कोई विशेष संसाधन नहीं है। जिले में न तो खेल स्टेडियम है और न ही कोई कोच। ऐसे में खिलाड़ी स्वयं अभ्यास करता है। सही कोचिंग न मिलने के चलते खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। कहा कि वह स्वयं सोनीपत साईं में कोच समीर के निर्देशन में अभ्यास रहे हैं। जिले के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और संसाधन मिले तो वह विश्व के फलक पर देश का नाम रोशन करेंगे।
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सुविधाएं न मिलने पर खेलों से हो रहा मोह भंग
हैमर थ्रोअर खिलाड़ी सरिता सिंह का कहना है कि खिलाड़ियों के अभ्यास करने के लिए जिले में स्टेडियम तक नहीं है और न ही कोच है। जिसके चलते जिले के खिलाड़ियों की प्रतिभा दम तोड़ रही है। कहा कि शासन-प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा खिलाड़ियों को भरना पड़ रहा है। जिले में कई खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन्होंने खेलों को छोड़ दिया है। वजह साफ है कि जब खिलाड़ियों को सुविधाएं और संसाधन ही उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं तो उनकी प्रतिभा कैसे निखर पाएगी। कहा कि जिले में स्टेडियम बनना चाहिए और खेल संसाधन भी विकसित होने चाहिए, ताकि जिले के खिलाड़ी आगे बढ़ सके।


सुविधा ही नहीं तो कैसे तैयार हों अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी
संभल के निशानेबाज दीपेंद सिंह का कहना है कि जिले में न तो अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल संसाधन हैं और न ही उपकरण। ऐसे में जिले से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी कैसे तैयार हो सकेंगे। खिलाड़ी की पहली सीढ़ी स्कूल लेवल पर ही खेल संसाधनों की जबरदस्त कमी है। सालों से संसाधनों के अभाव में खिलाड़ी जूझ रहे हैं। जिले में स्टेडियम की मंजूरी के साथ पांच कराेड़ रुपये की धनराशि जारी होने के बाद भी अभी तक स्टेडियम का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। जो ये दर्शाता है कि जिले के खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर अधिकारी कितने सजग हैं। कहा कि यदि खिलाड़ियों को संसाधन और सुविधाएं मिले तो जिले के खिलाड़ी संभल और देश का नाम रोशन करेंगे।
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