चंदौसी। परिवार न्यायालय में भरण पोषण को लेकर आए वाद में दंपती में सहमति बन गई। पति पत्नी को उसके खर्च के लिए पैसे देगा और किराए के मकान में रखेगा। महिला दूसरों के घरों में काम करना बंद कर देगी। साथ ही मायके वालों से संबंध नहीं रखेगी। सहमति होने पर दोनों ने इसके लिए छह माह का समय मांगा है।
परिवार न्यायालय की काउंसलर संगीता भार्गव ने बताया कि थाना धनारी क्षेत्र के गांव निवासी महिला ने न्यायालय में अपने व अपने दो बेटों के भरण पोषण के लिए वाद दायर किया था। बताया था कि पति ट्रक मालिक है और स्वयं चलाता है। उसका देवर उसके साथ जबरदस्ती करता था, तो ससुराल वाले शिकायत पर उसके साथ मारपीट करते थे।
फरवरी 2023 में ससुराल छोड़कर अपने भाई के घर आ गई। कुछ समय बाद चंदौसी में रहकर अपने व बच्चों के पालन पोषण के लिए कुछ घरों में काम करने लगी। इस मामले में सुनवाई के दौरान उन्हें काउंसलिंग का मौका दिया है। पति ने आरोप लगाया था कि वह दूसरों के घरों में काम करती है, मायके वालों से ज्यादा संबंध रखती है। वह ऐसा न करें, तो उसे साथ रखने के लिए तैयार है और गांव में भी नहीं रखेगा
। दोनों में सहमति बनी कि पति उसे महीने का खर्च देगा, किराए के मकान में रखेगा, बच्चों की पढ़ाई व अन्य चीजों का ख्याल रखेगा। वही पत्नी ने इसके लिए छह माह का समय मांगा है। कहा कि मायके से संबंध नहीं रखेगी। दूसरों के घरों में काम करना छोड़ देगी। इस बात पर पति ने सहमति दे दी है और दोनों साथ रहने को तैयार हो गए हैं।