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ईदगाह रहे सूने, घरों में अदा की नमाज

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असमोली के गांव ओबरी में ईद पर जामा मस्जिद में खुतवा पढ़ाते मौलाना। - फोटो : SAMBHAL
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संभल/ओबरी/रजपुरा। मुकद्दस रमजान के तीस रोजे पूरे होने की खुशी में सोमवार को जिले में ईदुल फितर का त्योहार शांति और अमन के माहौल में मनाया गया। नगर और देहात में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने घरों में नमाज अदा की। सामूहिक नमाज रोकने और लॉक डाउन का पालन कराने के लिए सुबह से ही सरकारी अमला सक्रिय हो गया। उप जिलाधिकारी राजेश कुमार और सीओ सिद्धार्थ ने संभल, सरायतरीन व सिरसी की ईदगाहों का दौरा किया। भारी पुलिस बल इन अधिकारियों के साथ रहा। जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह और पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद कोतवाली में रहे। अधीनस्थों से जिले भर की पल-पल खबर लेते रहे। अधिकारियों ने संभल में कुछ देर पैदल भ्रमण भी किया। पूरे जिले पर प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी रही। कोतवाली संभल और रजपुरा की पुलिस ने मुस्लिम इलाकों में ड्रोन कैमरों से निगरानी कराई। सतर्कता के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
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रविवार सुबह से ही लोगों ने ईद की तैयारियां शुरू कर दी थीं। जैसे ही तीसवें रोजे का इफ्तार हुआ। लोगों ने अपने घरों में ईद की नमाज की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया। महिलाओं ने घरों में ईद के लिए सिंवईं के अलावा अन्य व्यंजन तैयार किए। छोटे बच्चों से बड़ों तक में ईदुल फितर के त्योहार के प्रति उत्साह दिखाई दिया। जिले के ओबरी, असमोली, सिरसी, सरायतरीन, शहबाजपुर कलां, मंसूरपुरमाफी, अहरोलामाफी, मढन , सीढलमाफी, रतूपुरा, शाहपुरडसर, गुमसानी, सेंदरी, मुबारकपुरबंद, मनोटा , दबोइ कलां , दारापुर , एचोडा कंबोह में ईदुल फितर की नमाज अदा की गई। ओबरी गांव स्थित मदरसा दारुल उलूम गुलशने मुस्तफा के सदर मौलाना मोहम्मद अहसान रिजवी कहते हैं कि 1442 वर्ष में ऐसा पहली बार हुआ कि ईदुल फितर पर ईदगाहों में सन्नाटा पसरा रहा। लोगों ने घरों में ईद की नमाज अदा की। देश और दुनिया में कोरोना वायरस की महामारी के खात्मे और अमन के लिए दुआ की।
शिया बहुल गांवों में मनाई गई ईद
असमोली/संभल। शिया बहुल गांवों में ईद पर फिजां बदली हुई थी। नूरियो सराय, बुकनाला सादात, इकरोटिया, शाहपुर सिरपुडा गांव में लोगों ने घरों में ही ईद की नमाज अदा की। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। एक दूसरे को दूर से ही मुबारकबाद पेश की। ईद को लेकर पहले जैसी भीड़ भाड़ सड़कों पर नजर नहीं आई। ईद की बधाई देने के लिए परंपरागत तरीका नहीं अपनाया गया। न ही लोगों ने मुसाफा किया और न ही गले मिले।
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