बनियाठेर। गांव गुमथल के वनखंडी संत आश्रम पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को कथा वाचक हिरदेश शास्त्री ने परीक्षित जन्म की कथा सुनाई। कथा के बीच में राधा - कृष्ण के रूप में सजे कलाकारों ने श्रद्धालुओं के साथ फूलों की होली खेली। इस दौरान पूरा पंडाल भगवान के जयकारों से गूंज उठा।
कथा वाचक हिरदेश शास्त्री ने बताया कि भागवत पुराण उसी सनातन ज्ञान की कथा है, जो वेदों से प्रवाहित होती चली आई है। उन्होंने परीक्षित जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि गुरु द्रोण के मारे जाने से क्रोधित होकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। यह ब्रह्मास्त्र अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के लगने से उसके गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ।
बताया कि राजा परीक्षित का सुख वैभव से समृद्ध राज्य था। एक दिन वह क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम पहुंच गए और उन्होंने मुनि को आवाज लगाई। तप में लीन होने के कारण मुनि राजा को कोई उत्तर नहीं दे सके। इसे अपना अपमान समझकर राजा एक मृत सर्प को मुनि के गले में डाल कर चले गए। अपने पिता के गले में मृत सर्प को देख मुनि के पुत्र ने श्राप दे दिया कि जिस किसी ने भी मेरे पिता के गले में मृत सर्प डाला है। उसकी मृत्यु सात दिनों के अंदर सांप के डसने से हो जाएगी।
कथा में उर्मिला देवी, नीरज प्रजापति, अलका कुमारी, विद्यावती, कुसुम, लता, प्रवेश कुमार, चंचल, मोहिनी कुमारी, अंजली, पुष्पा देवी, सविता, आशा देवी, शीला देवी, कृष्णा देवी आदि मौजूद रही। संवाद