बहजोई(संभल)। बहजोई महाविद्यालय में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर हुई गोष्ठी की शुरुआत प्राचार्य डॉ. वीरेंद्र कुमार गुप्ता तथा राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गीता ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर की। इस अवसर पर प्राचार्य ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा हैं, जिसके सभी अक्षर समान हैं। इनमें न कोई बड़ा हैं न कोई छोटा। इसलिए यह सभी को समानता सिखाती हैं।गोष्ठी में शिक्षक डॉ. विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि देश में हिंदी दिवस की शुरुआत 1949 से हुई, जब हिंदी को राजकीय भाषा के रूप में अपनाया गया। नेमपाल सिंह ने कहा कि सर्वप्रथम महात्मा गांधी ने हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने का आह्वान किया गया था। यशपाल सिंह ने कहा कि हिंदी मन से मन को जोड़ने की भाषा है। हिंदी हमारी मातृभाषा हैं, इसलिए हमें हिंदी को आगे बढ़ाना चाहिए।
संजय कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में हम अंग्रेजों से स्वतंत्र तो हो गए लेकिन आज भी हम अंग्रेजी से स्वतंत्र नहीं हुए हैं। डॉ. गीता ने कहा कि भारत में हर भाषा का सम्मान हैं और हिंदी ईश्वर का वरदान हैं। प्रेंसी चौधरी ने जैसे मां के माथे पर बिंदी सजती हैं, वैसे ही हमारे हृदय में हिंदी बस्ती है के माध्यम से विचार रखे।
प्राचार्य डॉ. वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि आज हम सभी लोग यहां इसलिए इकट्ठे हुए ताकि हम अपनी भाषा को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकें।
इस दौरान गौरव कुमार, भगवान सिंह चौहान, संजय कुमार, पूजा शर्मा, प्रीति शर्मा, रामतीर्थ, भुवनेश कुमार, राजीव कुमार आदि रहे। संचालन डॉ. विष्णुदत्त शर्मा ने किया।