जिले में स्वास्थ्य सेवाएं खुद बीमार हैं। पदों के सापेक्ष चिकित्सकों की तैनाती 50 प्रतिशत भी नहीं है। ऐसे में मरीजों को भारी परेशानी का सामना कर पड़ता है। विभाग की ओर से भी लगातार चिकित्सकों की तैनाती के लिए मांग की जा रही है लेकिन पत्राचार का भी असर नहीं दिख रहा।
जिला अस्पताल में 23 पद चिकित्सकों के स्वीकृत हैं। तैनाती मात्र नौ चिकित्सकों की है। इसमें भी महिला रोग, नेत्र रोग और ह्दय रोग जैसे महत्वपूर्ण विशेषज्ञों की तैनाती नहीं है। इस समय महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं होने से ज्यादा समस्या है। ग्रामीण इलाके की गर्भवतियों को निजी चिकित्सालयों में उपचार कराना पड़ रहा है। जिला अस्पताल समेत सभी दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर सेंटर बन गए हैं। यही हाल जिले के दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है। कहने को तो 120 पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनाती फिलहाल 39 पदों पर है। जिले के ज्यादातर सीएचसी पर विशेषज्ञों की कमी का खामियाजा लोगों को उठाना पड़ता है। निजी अस्पतालों में मनमानी फीस वसूली जाती है और सरकारी स्तर पर उपचार मिलता नहीं।
डीएम भी चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन केे पत्र लिख चुके हैं। हम भी लगातार पत्राचार करते हैं। विशेषज्ञों की कमी से परेशानी तो है।
डॉ. तरन्नुम रजा, सीएमओ, संभल