संभल। जिला अस्पताल में धूल फांक रहे वेंटीलेटरों के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शासन को पत्र लिखकर स्टाफ तैनात करने की मांग की है। बीते दिनों शासन ने स्वास्थ्य विभाग से वेंटीलेटर की रिपोर्ट मांगी थी। जिला अस्पताल की ओर से अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी है। इसमें स्टाफ की कमी होने का हवाला दिया है। साथ ही तैनाती की मांग की है।
कोरोना काल में मरीजों की जान बचाने के लिए पीएम केयर फंड से जिला अस्पताल में 20 वेंटीलेटर मंगाए गए थे। करीब 50 लाख रुपये के यह वेंटिलेटर हैं। अभी तक इनका संचालन नहीं हो सका। यदि कभी यह काम आए तो सिर्फ मॉकड्रिल के काम आए हैं। इसके अलावा मरीजों को वेंटिलेटर का कोई लाभ नहीं मिल सका। इस मामले को अमर उजाला द्वारा उजागर किया गया तो शासन ने संज्ञान लिया और वेंटीलेटर को लेकर जानकारी तलब की थी। इसके बाद स्वास्थ्य महकमे ने तेजी दिखाते हुए शासन को पत्र लिखा है। इसमें वेंटिलेटर को संचालित करने के लिए जरूरी स्टाफ की तैनाती करने की मांग की है।
वेंटीलेटर को संचालन करने के लिए तीन शिफ्टों के स्टाफ की जरूरत
सीएमओ डॉ. तरन्नुम रजा ने बताया कि अस्पताल को मिले सभी 20 वेंटीलेटर क्रियाशील हैं। एमएनसीयू में वेंटीलेटर युक्त चार बेड का वार्ड बना हुआ है। लेकिन आईसीयू वार्ड नहीं है। वेंटीलेटर को संचालित करने के लिए तीन शिफ्टों के स्टाफ का प्रशिक्षण जरूरी है लेकिन अस्पताल में एक ही शिफ्ट का स्टॉफ है। शासन को रिपोर्ट भेजकर स्टॉफ नियुक्त करने की मांग की गई है।
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चिकित्सकों की कमी से भी जूझ रहा है जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में 23 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इसमें 9 ही पदों पर तैनाती है। 14 पद रिक्त चल रहे हैं। जिला अस्पताल 12 वर्ष से संचालित हो रहा है। स्टाफ की कमी शुरूआत से ही रही है। 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो सकी है। चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को रेफर किया जाता है। कार्यवाहक सीएमएस का कहना है कि लगातार शासन को पत्र लिखकर चिकित्सकों की तैनाती के लिए मांग की जा रही है।
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आरटीपीसीआर की लैब पर जांच बंद, नमूने ही लिए जा रहे
कोरोना काल के दौरान ही जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर की लैब संचालित की गई थी। कोरोना काल का अंत हुआ तो हेपेटाइटिस सी समेत कई महत्वपूण जांच की जाने लगी थीं। जांच करने वाला ज्यादातर स्टाफ संविदा पर तैनात था। शासन ने संविदा पर तैनात इन कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी है। इसका असर जिला अस्पताल की लैब पर पड़ा है। जो हेपेटाइटिस सी और बी की जांच दो से तीन दिन में मिल जाती थी उसके नमूने को अब मेरठ भेजा जा रहा है। वहां से कितने समय में जांच रिपोर्ट आएगी इसकी जानकारी अस्पताल प्रबंधन को नहीं है।