संभल। गांव सारंगपुर में निवासी महिला की डेंगू से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग चेत गया और रविवार को अधिकारियों ने गांव पहुंचकर स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। इस स्वास्थ्य शिविर में 500 मरीज पहुंचे। इसमें बुखार पीड़ित मरीजों की जांच कराई गई। इसमें 150 की मलेरिया की जांच की गई। जबकि 45 मरीजों की डेंगू की जांच कराई। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
वहीं, महिला की मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. मनोज चौधरी ने बताया कि महिला शुगर पीड़ित थी। इससे ही हालत बिगड़ी थी। इसके बाद ही मौत हुई है लेकिन महिला की एलिसा टेस्ट की जांच रिपोर्ट नहीं कराई गई।
कैलादेवी क्षेत्र के गांव सारंगपुर में डेंगू से पीड़ित सुनीता (35) की शनिवार को मौत हो गई थी। इस जानकारी के बाद रविवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और जांच कराई गई। जिला सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि गांव में बुखार का प्रकोप है लेकिन डेंगू का कोई मरीज नहीं मिला है। गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया है। फॉगिंग कराई है। जिससे मच्छरों से राहत मिल सके। गांव में बुखार पीड़ित मरीजों को सावधानी बरतने के लिए कहा है।
निजी अस्पताल में डेंगू के मरीज भर्ती हो रहे, पोर्टल पर नहीं बढ़ रहे मरीज
शहर के ज्यादातर निजी अस्पताल में डेंगू पीड़ित मरीजों का उपचार चल रहा है। सरकारी आंकड़ों में तो डेंगू पीड़ित की संख्या बढ़ नहीं रही है लेकिन निजी अस्पताल के चिकित्सक मान रहे हैं कि डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। डॉ. प्रशांत वार्ष्णेय ने बताया कि 15 दिन में चार से पांच मरीज डेंगू के आ चुके हैं। वायरल बुखार के मरीजों की संख्या ज्यादा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय वार्ष्णेय ने बताया कि बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। बच्चे ज्यादा चपेट में आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सचिन सक्सेना पैथोलॉजी लैब पर आरटीपीसीआर की जांच में रविवार को भी एक मरीज डेंगू पीड़ित मिला है। शहर की लाइफलाइन लैब संचालक शकील ने बताया कि एक सप्ताह में 4 से 5 मरीज डेंगू पीड़ित मिल चुके हैं। अब सवाल उठता है कि जब मरीजों की संख्या बढ़ रही है तो पोर्टल पर तीन क्यों दर्ज है।
प्लेटलेट्स कम होने को डेंगू से पीड़ित न समझे मरीज : जिला सर्विलांस अधिकारी
जिला सर्विलांस अधिकारी का कहना है कि वायरल बुखार में भी प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। प्लेटलेट्स कम होने को डेंगू माना जाए। यदि मरीज को सही जांच करानी है तो वह जिला अस्पताल में एलिसा टेस्ट कराए। उससे सही जानकारी मिलती है। उसके बाद ही उपचार शुरू करे। कई बार गलत जानकारी मरीज को दी जाती है और उसका इलाज शुरू कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में निशुल्क जांच होती है।
बरतें सावधानियां-
-ठंडा पानी पीने से बचें। इसके अलावा मैदा और बासी खाना भी न खाएं।
-खाने में हल्दी, अजवाइन, अदरक, हींग का ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल करें।
-इस मौसम में पत्ते वाली सब्जियां, अरबी, फूलगोभी खाने से बचें।
-हल्का खाना खाएं, जो आसानी से पच सके।
-पूरी नींद लें, खूब पानी पीएं और पानी को उबालकर पीएं।
-मिर्च मसाले और तला हुआ खाना न खाएं, भूख से कम खाएं, पेट भर न खाएं।
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