संभल। पिछले दिनों चकबंदी न्यायालय से कई सरकारी दस्तावेज चोरी हुई थीं। इन पत्रावली की संख्या का आकलन किया जा रहा है। अब न्यायालय से चोरी गईं पत्रावली की सूची तैयार कर पुलिस को देनी बाकी है, जिसके बाद रिपोर्ट दर्ज होगी।
इस दौरान अधिवक्ताओं ने स्टाफ से काफी नाराजगी जताई और पत्रावली चोरी होने की दशा में किसानों को होने वाली समस्याओं के बारे में भी अवगत कराया। मालूम हो शनिवार की सुबह संभल की पुरानी तहसील परिसर में स्थित चकबंदी न्यायालय का गेट टूटा मिला था। न्यायालय के अंदर पत्रावली भी इधर-उधर पड़ी हुई थीं। दो दिन तक पत्रावली चोरी होने का अंदेशा था, लेकिन सोमवार को यह बात सामने आ गई कि न्यायालय से पत्रावली की चोरी की गई है। जो पत्रावली चोरी की गई हैं उनमें नियम 109 की कई पत्रावली हैं और इसके अलावा चार से पांच मिसलबंद रजिस्ट्रर हैं। अब चकबंदी विभाग पत्रावली की सूची तैयार कर रहा है। यह बात उस समय सामने आई, जब संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता सीओ चकबंदी विजय शंकर सिंह के पास कार्रवाई न होने पर नाराजगी जाहिर करने के लिए पहुंचे थे।
इसी दौरान सीओ चकबंदी ने बताया कि कई पत्रावली न्यायालय से चोरी गई हैं। उनकी सूची पेशकार से बनवा रहे हैं। एक महिला लिपिक छुट्टी पर हैं, उनको भी बुलाया गया है। उनकी अलमारी की भी पत्रावली को भी चेक कराया जाएगा, जिससे साफ हो सके कि उनकी पत्रावली चोरी हुई हैं या नहीं। इस जानकारी के बाद अधिवक्ता आक्रोशित हो गए। कहा कि अब किसानों का क्या होगा। उन्होंने जो समय और धन की बर्बादी की। अब नियम 109 में निर्णय मिला था तो पत्रावली चोरी हो गईं। इन पत्रावली का रिकॉर्ड भी नहीं है।
सीओ चकबंदी और पेशकार ने बताया है कि नियम 109 की पत्रावली न्यायालय में नहीं है। मिसलबंद रजिस्ट्रर भी गायब हैं। इन पत्रावली के चोरी होने से तमाम किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। नियम 109 की पत्रावली को मनमाने तरीके से रोक रखा था। जबकि नियम 109 की पत्रावली का परवाना एक सप्ताह के अंदर देना चाहिए।
प्रदीप कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, संभल बार एसोसिएशन, संभल।