संभ्ाल में मंच से जनता का अभिवादन करते हन्ना हजारे
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समाजसेवी अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कालाधन वापस नहीं आने और लोकपाल कानून लागू नहीं होने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। यह भी कहा कि सरकार को किसानों की नहीं अडानी और अंबानी की चिंता है।
किसान पंचायत के दौरान अन्ना हजारे ने कहा कि इस सरकार को किसान की चिंता नहीं है। सरकार उद्योगपतियों की चिंता ज्यादा करती है। अडानी-अंबानी की चिंता ज्यादा करती है। मैंने सरकार को तीन साल तक सरकार को मौका दिया। मैं विरोध में नहीं बोला और तीन साल बीत गए।
सरकार बनने से पहले आश्वासन दिया था कि हम सत्ता में आने के बाद 30 दिन में विदेश का काला धन वापस लाएंगे और हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपये जमा करेंगे। तो लोग खुश हुए। जमकर वोट दिए और सरकार बन गई पर और अब तो तीन साल हो गए। 15 लाख रुपये छोड़ो, 15 रुपये भी जमा नहीं हुए।
मैं तो फकीर हूं. मेरे क्या किसी के खाते में रुपये नहीं आए। इसके अलावा मोदी ने कहा था कि हम सत्ता में आते हैं तो प्रभावी लोकपाल को लागू करेंगे। जो लोकपाल भ्रष्टाचार को कम करेगा लेकिन मोदी सरकार ने धारा 44 में संशोधन करके लोकपाल को कमजोर कर दिया है।
अब लोकसेवक अपनी संपत्ति को प्रत्येक वर्ष घोषित करने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने लोकपाल को कमजोर करने वाला विधेयक अपने विशेषाधिकार से पारित करा दिया। यह विधेयक 27 जुलाई 2016 को लोकसभा, 28 जुलाई को राज्यसभा से पास करा दिया और वो भी बिना चर्चा के।
29 जुलाई को राष्ट्रपति के साइन हो गए। तीन दिन में कानून लागू हो गया। वहीं असली लोकपाल अब तक प्रभावी न हुआ। अन्ना हजारे ने वित्तीय नियमों और कानूनों में संशोधन का जिक्र करते हुए कहा कि अब कारपोरेट जगत अपने मुनाफे का कितना भी धन राजनीतिक दलों को दान कर सकते हैं और उन्हें उस राजनीतिक दल का नाम बताने की मजबूरी भी नहीं है। नरेंद्र मोदी सरकार कारपोरेट जगत के साथ मिलकर लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा कर रही है।