फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गीदड़ के काटने से किसान की मौत

Mon, 16 Jan 2017 01:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
विज्ञापन
शिकायत
विज्ञापन
थाना बिलारी क्षेत्र के गांव चिड़िया भवन निवासी जगपाल सिंह (45) पुत्र नंदराम सिंह को पागल गीदड़ ने 16 दिसंबर 2016 को काट लिया था। जगपाल सिंह के भाई प्रेमपाल ने बताया कि इलाज के लिए संयुक्त चिकित्सालय चंदौसी लाए तो रैबीज के इंजेक्शन नहीं होने की बात कहकर वापस कर दिया। इसके बाद बिलारी अस्पताल में इंजेक्शन लगवाए। चार इंजेक्शन लगवाने के बाद 27 दिसंबर को चिकित्सकों को दिखाया तो उन्होंने कहा कि इलाज पूरा कर दिया है। अब चिंता की कोई बात नहीं है। 15 जनवरी को सुबह छह बजे जगपाल सिंह की हालत बिगड़ गई। प्रेमपाल सिंह अपने भाई को लेकर सुबह 11 बजे संयुक्त चिकित्सालय पहुंचे। यहां इमरजेंसी में कोई मौजूद नहीं था। 
विज्ञापन


ड्यूटी बोर्ड पर लिखे हुए मोबाइल नंबर पर करने के करीब एक घंटे बाद एक कर्मचारी आया। कर्मचारी ने कहा कि एक दो घंटे इंतजार करो। इसके बाद चिकित्सक आ जाएंगे। प्रेमपाल ने बताया गिड़गिड़ाने के बाद भी चिकित्सक नहीं आए। जगपाल ने तड़प-तड़प कर दोपहर दो बजे अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। प्रेमपाल ने चिकित्सकीय स्टाफ की लापरवाही से भाई की मौत का कारण बताते हुए पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। 

नरौली में बंदरों के हमले में छह घायल
चंदौसी। नरौली के मोहल्ला भट्ठी वाला में शनिवार की बंदरों ने नगर के छह लोगों पर हमला कर घायल कर दिया। इससे नगर में दहशत का माहौल है। नगरवासी बंदरों को पकड़ने की गुहार लगा रहे हैं। शनिवार की रात 10 बजे मोहल्ला भट्ठी वाला निवासी मोहम्मद शफी पुत्र बुद्घा, शाहिद पुत्र छिद्दा, छुन्ने पुत्र फरजंद, मोहम्मद शफी पुत्र नन्हे, रामआसरे पुत्र मुन्नालाल और मोहल्ला कुरैशियान निवासी कल्लू पुत्र बहादुर को खूंखार बंदरों ने अपना निशाना बनाया है। घायलों का कहना है कि नगर में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। बंदर चुपचाप अचानक हमला कर देते हैं। 
विज्ञापन



मेरे भाई को एक माह पहले पागल गीदड़ ने काट लिया था। बिलारी अस्पताल में चिकित्सक ने रैबीज के चार इंजेक्शन लगाने के बाद इलाज पूरा होने की बात कही थी। इसके बाद रविवार को सुबह मेरे भाई की हालत बिगड़ गई। चंदौसी के संयुक्त चिकित्सालय में सुबह 11 बजे लेकर आए। इमरजेंसी में चिकित्सकीय स्टाफ नहीं था। फोन कर इलाज के लिए गुहार लगाई। एक कर्मचारी आया और इंतजार करने के लिए कहा गया। दोपहर दो बजे मेरे भाई की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।  -प्रेमपाल सिंह, मृतक के भाई। 


इमरजेंसी डयूटी के लिए अस्पताल में गंभीरता बरती जाती है। दोपहर 01:10 बजे मरीज को देखा गया है। रजिस्टर में समय दर्ज है। मरीज के पहुंचने के कुछ देर बाद ही चिकित्सक मौके पर पहुंच गए। मरीज इलाज शुरू करने से पहले ही दम तोड़ चुका था। आरोप निराधार हैं। -डा. हरवेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक, संयुक्त चिकित्सालय चंदौसी। 


शिकायत की जांच कर ली गई है। ऐसी कोई बात नहीं है। कोई भी चिकित्सक अपने मरीज को मरते हुए नहीं देख सकता। रस्सी का सांप बनाया जा रहा है। ऐसी कोई बात नहीं है। -सुरेंद्र सिंह यादव, प्रभारी निरीक्षक, चंदौसी। 
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें