गन्ना एवं चीनी आयुक्त उत्तर प्रदेश के आदेश की पश्चिमी यूपी में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। चीनी मिल गन्ना माफियाओं के जरिये दूसरी मिलों के आरक्षित क्षेत्र के गन्ने की अवैध खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। जिससे हर रोज करोड़ों का खेल खेला जा रहा है। संभल और अमरोहा जिला गन्ने की अवैध खरीद-फरोख्त का सेंटर बन रहा है। कई जिलों में तो गन्ने की अवैध खरीद-फरोख्त के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है लेकिन अभी तक संभल जिला प्रशासन व गन्ना विभाग कुंभकर्णी नींद सो रहा है, हालांकि जिलाधिकारी के आदेश पर अवैध गन्ना खरीद रोकने व गन्ना माफियाओं पर कार्रवाई के लिए समिति का गठन कर दिया गया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 56 चीनी मिलों में सिर्फ मुरादाबाद मंडल में ही 21 चीनी मिलें हैं। यह कहना भी असत्य नहीं होगा कि मुरादाबाद मंडल के ही चार पांच चीनी मिलें ही गन्ने की अवैध खरीद-फरोख्त कर रही है, जो इस मंडल में गन्ना खरीद के लिए अभिशाप माना जा सकता है। कल ही मुरादाबाद के जिला गन्ना अधिकारी डा.सुभाष यादव ने संभल जिले के असमोली क्षेत्र में चेकिंग की थी, जिसमें असमोली की डीएसएम चीनी मिल के आरक्षित से क्षेत्र अनाधिकृत रूप से गन्ना खरीद कर बिलारी चीनी मिल ले जाए जाने का मामला सामने आने पर बिलारी मिल के अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। लेकिन यह सब संभल के जिला प्रशासन व जिला गन्ना अधिकारी को दिखाई नहीं दिया, ना ही इस तरह की कोई चेकिंग की गई है। बताते हैकि जिले से बाहर की कुछ चीनी मिलों ने संभल जिले के बड़े गन्ना माफियाओं से अनुबंध कर लिया है।
जिनके सहारे किसानों से खेतों में ही 230-240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना खरीदा जा रहा है। गन्ना माफिया इसी गन्ने को 300 रुपये प्रति क्विंटल खरीद कराने वाले चीनी मिलों को बेचती है, जिससे गन्ना माफियाओं को बिना कुछ किए ही मुनाफा मिल रहा है, चीनी मिलों को भी गन्ना सस्ते में और बिना लिखा पढ़ी के मिल रहा है। यदि कोई सबसे अधिक घाटे में जा रहा है तो वह सीधा साधा किसान। सूत्रों बताते हैंकि कई चीनी मिलें संभल जिले से लाखों के गन्ने की रोजाना गन्ने की अवैध खरीद-फरोख्त कर रही हैं।